• व्यापमं कांड से जुड़े सभी केसों की जांच खत्म
  • पीएमटी कांड की जांच खत्म करने में लगा है सबसे अधिक समय

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सीबीआइ ने व्यापम कांड से जुड़े सभी केसों की जांच खत्म कर ली है। प्रमुख केस पीएमटी कांड से जुड़े थे। इनकी जांच खत्म करने में सीबीआइ को पांच साल लग गए, लेकिन पीएमटी कांड से जुड़े केसों को फैसले तक पहुंचाने में दोगुना से ज्यादा समय लग सकता है। क्योंकि प्रमुख केसों में आरोपितों की संख्या काफी अधिक है। आरोप तय से लेकर गवाही कराना एक बड़ी चुनौती है। इस मामले में नईदुनिया ने शहर के कानून विदों से चर्चा कर ट्रायल चुनौतियों का पता किया।

व्यापम कांड का खुलासा वर्ष 2014 में हुआ था। पीएमटी, आरक्षण भर्ती सहित अन्य परीक्षाओं में हुए फर्जीवाड़े को लेकर केस दर्ज किए गए। सवा साल तक एसआइटी ने इस मामले की जांच की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर व्यापम से जुड़े केस सीबीआइ को हैंडओवर हो गए। ग्वालियर रीजन के 55 केस सीबीआइ को हैंडओवर हुए। सीबीआइ को केस हैंडओवर होने के बाद नए सिरे से जांच शुरू की गई। अराक्षक भर्ती, शिक्षक भर्ती, वनपाल सहित अन्य भर्तियों के केसों की जांच खत्म करने में सीबीआइ को दो से ढाई साल लगा, लेकिन पीएमटी कांड से जुड़े केसों की जांच खत्म करने में पांच साल लग गए। ज्ञात हो कि 55 केसों में से छोटे-छोटे 20 केसों में फैसला हो चुका है। 20 में से 18 केसों में आरोपितों को सजा हुई है, जबकि दो केस के आरोपित दोषमुक्त हुए हैं।

ऐसे समझें क्यों लग सकता है समय

- अपराध क्रमांक 449/2014 मध्य प्रदेश शासन बनाम गुलाब सिंह माथुर केस पीएमटी कांड से जुड़ा है। इसमें 201 आरोपित हैं और चालान 800 पेज का है। इस केस में 31 जनवरी 2020 को चालान पेश हुआ था, लेकिन साल में आरोपितों पर आरोप तय नहीं हुए हैं। इस केस में करीब 600 गवाह हैं। इस केस में आरोपितों के 50 ज्यादा वकील खड़े हो सकते हैं। हर 15 दिन में गवाह बुलाया जाता है। एक गवाह दो तारीखों में होता है तो सालभर में सिर्फ 12 गवाह हो सकते हैं। जबिक गवाहों की संख्या 600 है।

- अपराध क्रमांक 138/2014 में 126 आरोपितों के खिलाफ चालान पेश किया गया है। इस केस से जुड़े कुछ आरोपित फरार हैं। इस कारण चालान कमिट भी नहीं हो सका है। पांच दिसंबर 2020 को सीबीआइ ने चालान पेश किया था। इसमें 400 के करीब गवाह हैं।

- चिरायु मेडिकल कालेज के फर्जीवाड़े में 60 आरोपित बनाए गए हैं। सीबीआइ ने सबसे आखिरी में इस मामले का चालान पेश किया है। 28 जनवरी 2021 से आरोपितों की उपस्थित तय होगी।

- गुलाब सिंह माथुर केस का चालान पेश करते समय कोर्ट ने भी सीबीआइ के चालानों को लेकर सवाल किया था कि इनकी ट्रायल कैसे पूरी होगी। सीबीआइ का तर्क था कि कोई तरीका निकालेंगे।

ट्रायल में ये बाधाएं

- सीबीआइ ने सभी चालान अग्रेंजी में पेश किए हैं। आरोपित चालान की कापी हिंदी में मांग रहे हैं। हाई कोर्ट से चालान की कापी हिंदी में दिए जाने का आदेश दिया जा चुका है। सीबीआइ को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई। यदि सीबीआइ की एसएलपी खारिज हो जाती है तो चालान की कापी हिंदी में देनी होगी।

- चालान में आरोपितों की संख्या अधिक है। एक भी आरोपित अनुपस्थित हो जाता है तो आरोप भी लगाना मुश्किल हो जाएगा। अधिकतर आरोपितों के साल्वर दूसरे राज्यों से हैं।

- केस में वकीलों की संख्या अधिक है। यदि आरोपित उपस्थित हो गया, उसका वकील नहीं पहुंच पाया तो आगे की कार्रवाई करना संभव नहीं है।

- आरोप तय होने के बाद आरोपित उच्च अदालतों में केस को चुनौती भी दे सकते हैं।

- आशीष चतुर्वेदी भी इन केसों में प्रमुख गवाह के रूप में है। जैसे कि राहुल यादव केस की ट्रायल झांसी रोड थाना पुलिस कर रही है। इस केस में सभी गवाह हो चुके हैं, लेकिन आशीष की गवाही नहीं होने से पिछले दो साल से फैसला लटका हुआ है।

- सीबीआइ ने एसआइटी के अधिकारियों को गवाह के रूप में शामिल किया है। ये अधिकारी पूर्व से चल रही ट्रायलों में गवाही के लिए उपस्थित नहीं हो रहे हैं।

इनका कहना है

केस में आरोपितों की संख्या अधिक है। पहले तो आरोप तय करना बड़ी चुनौती है। केसों की जो स्थिति है, उस हिसाब से देखा जाए तो 10 से 15 साल ट्रायल खत्म करने में लग जाएंगे। इससे अधिक समय भी लग सकता है। एक भी आरोपित अनुपस्थित होता है या फिर कोई आवेदन पेश कर देता है तो कोर्ट को तारीख बढ़ानी पड़ेगी।

पीयूष गुप्ता, अधिवक्ता जिला एवं सत्र न्यायालय

Posted By: anil.tomar

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