- नगर निगम व नपा, नपं के अध्यक्षों पद के आरक्षण पर रोक का मामला

Gwalior Court News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की युगल पीठ उस जनहित याचिका पर 21 जून को अंतिम सुनवाई करेगी, जिसमें नगर निगम के महापौर, नगर पालिका व नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद के आरक्षण पर रोक लगा दी थी। रक्षण को लेकर शासन ने अपना जवाब पेश कर दिया। संविधान के अनुच्छेद 243 व नगर पालिका अधिनियम की धारा 29 में नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायतों के जो अध्यक्ष चुने जाने हैं, उनके पदों के रक्षण का अधिकार शासन को दिया है। अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए जो पद रक्षित किए जाते हैं, वह जनगणना के धार पर तय किए जाते हैं। जनसंख्या के समानुपात के धार पर रक्षण किया जाता है। एसे नहीं है कि एक पद रक्षित हो गया है, उसे दुबारा रक्षित नहीं किया जा सकता है। महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष व नगर पंचायत अध्यक्षों के पद रक्षित करने में कोई गलति नहीं की है। कानून का पालन करते हुए रक्षण किया गया है।

हाई कोर्ट में नगर निगम के महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष व नगर पंचायत अध्यक्षों आरक्षण को चुनौती देने के लिए पांच जनहित याचिकाएं दायर की हैं। हाई कोर्ट ने मार्च में दो नगर निगम, 79 नगर पालिका, नगर पंचायत के आरक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी और शासन से जवाब मांगा था। अप्रैल में शासन की ओर से कहा गया था कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर रहे हैं। कोर्ट ने याचिका की तारीख बढ़ा दी थी। कोविड-19 के संक्रमण के चलते हाई कोर्ट में गर्मी की छुट्टी जल्दी शुरू हो गई थी। साथ ही वीडियो कान्फ्रेंस से कोर्ट शुरु हो गए। गर्मी की छुट्टी खत्म होने के बाद फिर से वीडियो कान्फ्रेंस से सुनवाई शुरु हुई है। गुरुवार को चीफ जस्टिस की बैंच में यह याचिका लिस्ट की गई। कोर्ट ने 21 जून को अंतिम सुनवाई की तारीख निर्धारित की है। शासन ने लिखित में अपना जवाब पेश कर दिया। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी उपस्थित हुए।

क्या है मामला

बहोड़ापुर निवासी अधिवक्ता मनवर्धन सिंह तोमर ने याचिका में तर्क दिया है कि शासन ने दो नगर निगम व 79 नगर पालिका व नगर पंचायतों को अनुसूचति जाति व जनजाति के लिए आरक्षित किया है। मुरैना व उज्जैन नगर निगम के महापौर का पद वर्ष 2014 में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थे। 2020 में भी इन सीटों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रखा है। नगर पालिका व नगर पंचायतों अध्यक्षों के आरक्षण में ऐसा ही किया गया है, जबकि वर्ष 2020 के चुनाव में रोटेशन प्रणाली का पालन करते हुए बदलाव करना था। रोटेशन प्रक्रिया का पालन नहीं होने से अन्य वर्ग के लोग चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं। ये लोगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

इन याचिकाओं पर की जा रही है सुनवाई

रवि शंकर बंसल ने डबरा नगर पालिका के अध्यक्ष की आरक्षण प्रक्रिया को चुनौती दी थी। इसके बाद बलवीर मिश्रा व राजकुमार मिश्रा ने इंदरगढ़ नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष के आरक्षण को चुनौती दी।

- हाई कोर्ट ने इन दोनों जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए आरक्षण आरक्षण पर रोक लगा दी।

- मनवर्धन सिंह ने प्रदेश की दो नगर निगम व 79 नगर पालिका, नगर पंचायत के आरक्षण को चुनौती दी। इस याचिका की सुनवाई करते हुए 10 व 11 दिसंबर 2020 की अधिसूचना पर रोक लगा दी। इस आदेश से चुनाव प्रक्रिया रुक गई।

- भिंड के दबोह नगर पंचायत के अध्यक्ष पद आरक्षण को भी चुनौती दी गई है।

Posted By: anil.tomar

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