Gwalior Court News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। अपर सत्र न्यायाधीश अशोक शर्मा ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले आरोपित को सात साल की सजा सुनाई है। 18 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। आरोपित ने फरियादी से फार्म भरवाने के नाम पर 1250 रुपये की ठगी की थी। कोर्ट ने आरोपित को सजा काटने के लिए जेल भेज दिया।

अतिरिक्त लोक अभियोजक मृत्युंजय गोस्वामी ने बताया कि दीपक नामदेव ने 22 जून 2015 को गोला का मंदिर थाने में शिकायत की। उसने पुलिस को बताया कि उसके पास सर्वसदन भदौरिया निवासी ग्राम कुआरी जिला गरा का फोन या। उसे स्मार्ट लाइफ इंटरप्राइजेज में नौकरी दिला देंगे। इस सवाल पर नामदेव ने कहा कि पको नंबर कहां से मिला है। मैंने तो वेदन भी नहीं भरा है। कैसे नौकरी मिल जाएगी। सर्वसदन भदौरिया ने कहा कि इसकी फिक्र मत करो। मुझसे कर मिल लो और फार्म भी भर जाएगा। गोवर्धन कालोनी में फरियादी सर्वसदन भदौरिया से मिलने पहुंचा। उसने धार कार्ड, मार्कसीट सहित अन्य दस्तावेज लिए। वेदन भरने के नाम पर 1250 रुपये जमा कराए। एक बंद लिफाफा दिया कि दिल्ली भेज दिया। लिफाफे पर पता लिखा कि तीन फ्लोर स्कूल सकरपुर लिखा था। यह लिफाफा वहीं खुलेगा। वहां पर सुपरवाइजर की नौकरी मिल जाएगी। जब वह दिल्ली पहुंचा तो उसे कोई नहीं मिला। इसके धोखाधड़ी के खिलाफ उसने गोला का मंदिर थाने में वेदन किया। पुलिस ने नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले रोपति सर्वसदन के खिलाफ केस दर्ज किया। जांच के बाद चालान पेश किया। रोपित ने बचाव में साक्ष्य दिया कि उसका पहला अपराध है। इसलिए सजा देने में नरमी बरती जाए। कोर्ट ने कहा कि निसंदेह रोपित का पहला अपराध है, लेकिन नव युवकों को नौकरी का झांसा देकर ठगी का प्रयास किया है। उनके साथ छल कारित किया है। कूटरचित दस्तावेज बनाए। ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रोपित को दंडित किया जाना उचित होगा। कोर्ट ने रोपित को सात साल की सजा सुनाई है।

Posted By: anil.tomar

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