Gwalior Creative City plan News: प्रियंक शर्मा.ग्वालियर। शहर को एक बार फिर यूनेस्को के क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क में शामिल करने की कवायद शुरू की गई है। इस बार यूनेस्को ने क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क के लिए शहर की संस्कृति, विरासत के साथ ही शहर के लोगों की खुशहाली और शहर विकास योजना में बदलाव की सिफारिश की तैयारी की है। इसके लिए यूनेस्को ने शहर की साफ-सफाई से लेकर यातायात, आयोजनों पर भी फोकस किया है। यूनेस्को की सलाहकार संस्था धरातल ने ग्वालियर के लिए प्रेजेंटेशन तैयार कर लिया है। सात दिसंबर को इस संबंध में भोपाल में एक बैठक का भी आयोजन किया गया है। इसमें ग्वालियर से जिला प्रशासन, नगर निगम तथा स्मार्ट सिटी के अधिकारी शामिल होंगे।

यूनेस्को ने अपने अर्बन लैंडस्केप सिटी प्रोग्राम में ग्वालियर और ओरछा को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी की सूची में शामिल कर लिया था। अब क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में ग्वालियर की सिटी आफ म्यूजिक के लिए दावेदारी की जानी है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर भी लंबे समय से प्रयास चल रहे हैं और दो बार इसमें विफलता का सामना भी करना पड़ा है। अब दावेदारी को मजबूत करने के लिए यूनेस्को की ओर से शहर विकास योजना में परिवर्तन करने की सिफारिश की जा रही है। इसमें शहर के तीनों उपनगरों ग्वालियर, लश्कर और मुरार को शामिल किया गया है। इन तीनों उपनगरों में सड़कों के चौड़ीकरण, जाम की समस्या को समाप्त करने के साथ ही यहां मौजूद ऐतिहासिक इमारतों को निखारने के बिंदु शामिल हैं।

धरोहरों को सहेजता है यूनेस्को: यूनेस्को दुनियाभर के उन स्थलों की पहचान करती है, जिसे मानव द्वारा उत्कृष्ट मूल्यों का माना जाता है। इन स्थलों में मानव निर्मित इतिहास और प्राकृतिक दोनों तरह के स्थल या इमारतें शामिल होते हैं। यूनेस्को ऐसी ही सभी विश्व धरोहरों को प्रोत्साहन देने का कार्य करता है। इन धरोहरों को सूचीबद्घ कर अंतरराष्ट्रीय संधियों और कानूनों के जरिए संरक्षण दिया जाता है। यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क वर्ष 2004 में बना। इसके तहत शहरों का चयन सात श्रेणियों में किया जाता है। इनमें हस्तशिल्प एवं लोक कला, डिजाइन, फिल्म, पाक-कला, साहित्य, संगीत एवं मीडिया आर्ट शामिल है।

ये हैं मुख्य सिफारिशें

- स्वर्ण रेखा में गंदा पानी नहीं बहना चाहिए। इसके लिए शहर के चारों कोनों पर मौजूद पुराने बांधों से गाद हटाने की जरूरत है।

- एलिवेटेड रोड से स्वर्ण रेखा का स्वरूप बदल जाएगा।

- नालियों में गंदा पानी बहने के बजाय सीवेज सिस्टम से होता हुआ सीधे सीवर ट्रीटमेंट प्लांट तक जाना चाहिए।

- लश्कर क्षेत्र में अधिकांश हेरिटेज इमारतें हैं। महाराज बाड़ा, दौलतगंज, सराफा बाजार जैसे इलाकों में होर्डिंग, बैनर, पोस्टर नहीं लगने चाहिए। दुकानों के बोर्ड भी छोटे हों।

- तीनों उपनगरों के पुराने बाजारों में संकरी गलियां हैं और यहां जाम भी लगता है। ऐसे में ट्रैफिक प्लान तैयार होना चाहिए।़ऩिाशहर की साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए।

- धरोहरों तक पहुंचने वाले रास्ते सुगम होने चाहिए।

- शहर में पिकनिक स्पाट विकसित किए जाने की आवश्यकता है, जहां लोग परिवार के साथ लुत्फ ले सकें।

देश के ये शहर हैं क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में शामिल

वाराणसी: क्रिएटिव सिटी आफ म्यूजिक-वर्ष 2015

जयपुर: क्राफ्ट्स एंड फोक आर्ट्स-वर्ष 2015

चैन्नई: क्रिएटिव सिटी आफ म्यूजिक-वर्ष 2017

हैदराबाद: गेस्ट्रोनोमी-वर्ष 2019़मिुंबई-फिल्म-वर्ष 2019

श्रीनगर: क्राफ्ट्स एंड फोक आर्ट्स-वर्ष 2021

सात दिसंबर को होगी बैठक

यूनेस्को की क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क के लिए सात दिसंबर को भोपाल में बैठक का आयोजन किया जाएगा। इसमें यूनेस्को की तरफ से प्रेजेंटेशन दिया जाएगा।

किशोर कान्याल, आयुक्त नगर निगम

शिहर विकास योजना का देंगे प्रेजेंटेशन

सात दिसंबर को होने वाली बैठक में हम ग्वालियर की शहर विकास योजना के संबंध में कुछ बिंदुओं पर प्रेजेंटेशन देंगे। इसमें संस्कृति, विरासत के साथ ही शहर की खुशहाली सहित कुछ अन्य बिंदुओं को शामिल किया गया है।

निशांत उपाध्याय, फाउंडर, आर्किटेक्ट धरातल संस्था

Posted By: anil tomar

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