Gwalior Crime News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर में बढ़ते दुष्कर्म के मामले बेशक चिंता का विषय है, लेकिन इसमें चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है- दुष्कर्म के अधिकांश मामलों में पीड़िताएं कोर्ट में सुनवाई के दौरान अपने बयान से मुकर रही हैं। आंकड़े बताते हैं- इस साल दुष्कर्म के जिन मामलों में सुनवाई हुई, उनमें से 68.62 प्रतिशत मामलों में पीड़िताएं ही अपने बयान से मुकर गईं और इसके चलते इन मामलों में आरोपित बरी हो गए। यानि दुष्कर्म के महज करीब 32 प्रतिशत मामलों में ही आरोपितों को सजा हुई। लगभग यही स्थिति पिछले साल की भी है...बयानों से मुकरने के मामले पिछले दो साल में तेजी से बढ़े हैं। अब इसे लेकर पुलिस अधिकारियों से लेकर कानूनविदों तक यही चर्चा है कि कहीं यह कानून का दुरुपयोग तो नहीं। नईदुनिया टीम ने दुष्कर्म के मामलों से लेकर अंडर ट्रायल और जिन मामलों में फैसला हुआ, उन सभी मामलों के आंकड़ों की पड़ताल की। जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

जानिए...कितने मामलों में बयान से मुकर गईं पीड़िताएं:

- 1 जनवरी 2022 से नवंबर 2022 तक दुष्कर्म के 102 मामलों में कोर्ट में सुनवाई के बाद फैसला आया। 102 में से 70 मामलों में आरोपित बरी हो गए, इसमें वजह थी- पीड़िताओं का बयान से मुकर जाना। धारा 164 के तहत बयान होने के बाद भी पीड़िताएं मुकर गईं और आरोपित बरी हो गए। 102 में से महज 34 आरोपितों को ही सजा हुई। यानि 68.62 प्रतिशत मामलों में पीड़िताएं बयान से मुकरीं।

- 1 जनवरी 2021 से दिसंबर 2021 तक दुष्कर्म के 95 प्रकरणों में कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसमें से 58 दुष्कर्म के प्रकरणों में पीड़िताएं बयान से मुकरीं और आरोपित बरी हो गए। 2021 में लगभग 61.05 प्रतिशत मामलों में आरोपित बरी हो गए।

नोट: यह आंकड़े एसएसपी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार हैं।

आंकड़े...

किस माह में कितने हुए दुष्कर्म:

माह- दुष्कर्म

जनवरी- 19

फरवरी- 20

मार्च- 15

अप्रैल- 20

मई- 28

जून- 29

जुलाई- 28

अगस्त- 20

सितंबर- 26

अक्टूबर- 21

कुल- 226

विश्लेषण: इस साल जनवरी से अक्टूबर माह के बीच हुए 226 प्रकरणों का विश्लेषण जब नईदुनिया टीम ने किया तो चौंकाने वाला एक और तथ्य सामने आया। इसमें सामने आया कि करीब 80 प्रतिशत दुष्कर्म के मामलों में पीड़िताओं ने लिवइन में कई महीनों तक रहने के साथ ही शादी का झांसा देकर दुष्कर्म हुए जाने की एफआइआर दर्ज कराई। यानि 80 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जिनमें पीड़िताएं आरोपितों के साथ प्रेम संबंध में थीं।

ऐसी भी पीड़िताएं...एक ही फरियादिया, दो से ज्यादा कराई दुष्कर्म की एफआइआर, एक ही आरोपित पर दोबारा भी एफआइआर:

नईदुनिया टीम ने दुष्कर्म के कुछ ऐसे मामले निकाले, जिसमें एक ही पीड़िता ने दो से ज्यादा दुष्कर्म की एफआइआर और आवेदन थाने में दिए हैं। इतना ही नहीं एक ही आरोपित पर दोबारा भी दुष्कर्म की एफआइआर के मामले सामने आए हैं।

- महाराजपुरा इलाके में एक ऐसी महिला चिन्हित की गई है, जिसने अलग-अलग थानों में कई लोगों के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत के लिए आवेदन दिया हुआ है। इसी तरह कंपू की एक महिला ने दो एफआइआर अलग-अलग लोगों पर दर्ज कराई।

- उपनगर ग्वालियर में रहने वाली एक युवती ने पहले एक युवक पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया, फिर केस वापस लेने के लिए धमकाने और इसके बाद दोबारा दुष्कर्म की एफआइआर दर्ज कराई।

इधर...दहेज प्रताड़ना के साथ अप्राकृतिक कृत्य की एफआइआर, जिससे पति पहुंचे सलाखों के पीछे:

दहेज प्रताड़ना के साथ अप्राकृतिक कृत्य की एफआइआर भी होने लगी है। यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। पहले दहेज प्रताड़ना की धारा में ही एफआइआर होती थी, लेकिन अब दहेज प्रताड़ना के साथ महिलाएं अप्राकृतिक कृत्य जैसी धारा भी जुड़वा रही हैं। इसके पीछे वजह है- दहेज प्रताड़ना के मामले में अब पुलिस गिरफ्तार नहीं करती। जबकि अप्राकृतिक कृत्य गैर जमानती अपराध है, 7 साल से अधिक की सजा का प्रावधान होने की वजह से इसमें जेल जाना ही होता है।

एक्सपर्ट व्यू:

अगर ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमें पीड़िताएं बयान से मुकर रही हैं और आरोपित बरी हो रहे हैं तो कोर्ट द्वारा ऐसे मामलों में स्वत: संज्ञान लिया जा सकता है। ऐसे मामलों में केस भी दर्ज कराया जा सकता है। हालांकि हमारे समय ऐसे मामले नहीं आते थे।

एनके मोदी, रिटायर्ड हाईकोर्ट जज

Posted By: anil tomar

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