ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर के कंपू थाने की पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है। दुष्कर्म पीड़िता को 6 दिन तक बार-बार थाना से लौटाया। सोमवार को जब युवती एफआइआर के लिए अड़ गई तो महिला अफसर न होने का हवाला देते हुए उसे नौ घंटे तक थाना में बैठाकर रखा गया। विवाद बढ़ा तब जाकर एसएएफ जवान पर मामला दर्ज किया गया। पीड़िता ने कंपू के थाना प्रभारी केएन त्रिपाठी के अभद्र भाषा व एफआइआर दर्ज नहीं करने की धमकी देने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया है। अभी 20 दिन पहले भी एक पीड़ित महिला को थाना से भगाने का वीडियो पर सोशल मीडिया पर आया था।

शहर के तारागंज निवासी एक युवती की पहचान करीब 3 साल पहले भिंड के सोनी स्थित सैंथरी गांव निवासी मनीष भदौरिया पुत्र होतम सिंह से हुई थी। मनीष भदौरिया ग्वालियर शहर में स्थित एसएएफ की 13 बटालियन में जवान के रूप में पदस्थ है। दोनों के बीच प्रेम संबंध हो गए। शादी का भरोसा दिलाकर युवती के साथ जवान ने दुष्कर्म किया। जब युवती ने शादी के लिए कहा तो उससे कहा कि 3 साल तक मेरी पढ़ाई है मुझे अफसर बनना है। इस पर युवती ने उसकी बात मान ली। युवती ने फिर शादी के लिए कहा तो 30 जून 2020 को बड़े की शादी के बाद अपनी शादी करने की बात कही। विश्वास दिलाने के लोहामंडी स्थित आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली और संबंध बनाए। इसी बीच युवती को उसके किसी और युवती से संबंध का पता लगा।

विरोध किया तो आरोपित एसएएफ जवान ने धमकाया। इस पर 8 सितंबर को युवती ने कंपू थाना पहुंच गई। पीड़िता का आरोप है कि कंपू थाना प्रभारी केएन त्रिपाठी ने उसकी शिकायत को अनसुना करते हुए जवान के खिलाफ एफआइआर दर्ज नहीं की, क्योंकि जवान के दो भाई सब इंस्पेक्टर हैं। एक इंदौर व एक भिंड जिले में पदस्थ है। यही कारण है कि कई दिन से थाना पुलिस उसे थाने के चक्कर लगवा रही थी। सोमवार को भी सुबह 10.30 बजे थाना पहुंच गई थी। इसके बाद महिला अफसर न होते हुए बाद में आने के लिए कहा। पर वह बैठी रही। जब दबाव बढ़ा तो 9 घंटे थाना में बैठाकर रखने के बाद सोमवार शाम 7.30 बजे मामला दर्ज किया है।

एसपी के पास जाओ तो भी नहीं होगी एफआइआर

इस बीच सोशल मीडिया पर पीड़िता से थाना प्रभारी कंपू केएन त्रिपाठी की बातचीत का ऑडियो भी वायरल हुआ है। जिसमें टीआइ कह रहे हैं कि मामला दर्ज नहीं कर सकते। पीड़िता ने एसपी के पास जाने की बात कही तो उसे धमकाते हुए कहा। चाहें एसपी के पास जाओ या किसी और के पास, बिना जांच के एफआइआर दर्ज नहीं होगी।

पहले एफआइआर फिर जांच

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर और उनके साथ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है। कि पीड़िता के थाने आने के बाद न तो उसे लौटाया जाएगा न ही मामला जांच के बाद दर्ज कहने की बात कहकर टाला जाएगा। पीड़िता के थाना पहुंचने पर सबसे पहले प्रकरण दर्ज करना होता है। उसके बाद जांच की जाए।

एसएएफ जवान के साथ युवती की दोस्ती थी। दुष्कर्म की शिकायत की थी। उस पर मामला दर्ज कर लिया गया है। महिला अफसर न होने के कारण कुछ देर हुई है। महिला के आरोपों की जांच की जा रही है। अमित सांघी, एसपी ग्वालियर

Posted By: Nai Dunia News Network

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