Gwalior Dharma Samaj News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जैसे संस्कार होंगे, वैसा ही हमारा संसार होगा। संस्कार से ही हम संस्कृति को प्राप्त कर सकते हैं। संस्कार ही एक ऐसी वस्तु है, जो जन्म से लेकर मरण तक काम आती है। जन्म के समय संस्कार होते हैं तो मरण के समय भी होते हैं। यदि जन्म से हमारे संस्कार अच्छे हो तो मरण भी अच्छा होता है। मरण अच्छा श्रेष्ठ होने का अर्थ है कि अब हमारी यात्रा दैत्य की नहीं देवत्व की होगी। यह बात मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने बुधवार को नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला में आयोजित धर्मसभा में उपस्थित सदस्यों को संबोधित करते हुए कही।

मुनिश्री ने कहा कि संस्कारों से ही संसार का अंत होता है। संस्कारों से ही हमारा संसार अनंत भी होता है।अर्थात संस्कार से हम संसार से तर सकते हैं। संस्कार से डूब भी सकते हैं। हमारे अच्छे संस्कार ही स्वर्ग और मोक्ष हैं। यह संस्कार में कुछ तो हमें मां के गर्भ से प्राप्त होते हैं तो कुछ पूर्व जन्म के होते हैं। कुछ संगति के होते हैं। इन सब संस्कारों में मां के द्वारा दिए गए संस्कार ही श्रेष्ठ होते हैं। इसलिए माताओं को चाहिए कि यदि वे अपनी संतान को कंस नहीं कृष्ण, मारीच नहीं महावीर, रावण नहीं राम, बुद्धू नहीं बुद्ध बनाएं।

Posted By: anil.tomar

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