Gwalior Dharma samaj News: ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। संसार के प्रत्येक जीव को कर्मों के आधार पर फल मिलता है। अच्छे कर्म करने पर सुख प्राप्त होता है तथा बुरे कर्म करने पर दुख भोगना पड़ता है। इसलिए मनुष्य रूपी जीव को हमेशा अच्छे कर्म करने का प्रयास करना चाहिए। कर्मो के आधार पर ही जीव को अच्छे व बुरे कार्यो को भोगना पडता है। यह बात गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी ने आज शनिवार को उपग्वालियर स्थित दिगंबर लाला गोकुलचंद जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।

गणिनी आर्यिकाश्री ने कहा कि महाराजा दशरथ द्वारा भगवान राम को अयोध्या का राजा बनाया जा रहा था तथा उनके राज्य तिलक की तैयारी की जा रही थी। लेकिन उस समय पर उनके भाग्य मे राज्य तिलक नही था। वह राजा नही बन सकते थे। इसलिए उन्हे राजा न बनाकर वन भेजा गया। यह सब जीव के भाग्य में लिखा होता है तथा उसका समय निश्चित होता है। दूसरी ओर त्याग की प्रतिमूर्ती भरत ने कभी भी राजा बनने का नही सोचा था लेकिन उन्हें राजा बनने का अवसर मिला। उनके भाग्य में राजा बनना था। इस प्रकार इसांन के भाग्य मे जो लिखा होता है वह पहले से तय होता है। इस लिए इंसान को हमेशा ईश्वर से भरोसा करके अच्छे कर्म करना चाहीए। फल की इच्छा न रखना चाहिए।प्रवचनों से पहले मंदिर समिति के अध्यक्ष पदमचंद जैन, मंत्री देवेंद्र जैन, दिलीप जैन काजू, मनीष जैन, नवरंग जैन, अभिलाष जैन, रविन्द्र जैन, आलोक जैन, राजुल जैन, राहुल जैन, अमित जैन ने श्रीफल भेंटकर मंगल आशीर्वाद लिया।

भक्तामर स्त्रोत 48 दीपक समर्पित कर मधुर स्वर लहरियों से गूंज उठा

जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी ससंघ सानिध्य में प्रतिदिन चल रहे भक्तामर पाठ में जैन समाज ग्रीन साड़ियों में महिलाये पहुँचकर धर्म लाभ ले रहे है। गणिनी आर्यिकाश्री माताजी रिद्धि-सिद्धि मंत्रों के बीच 48 दीपकों के साथ भक्तामर स्त्रोत का पाठ कर प्रत्येक श्लोक पर महिलाएं व पुरुषवर्ग ने सामूहिक रूप से दीपक प्रज्वलित कर मंडप पर समर्पित किए। वहीं आचार्य मानतुंग रचित स्त्रोत की महिमा का गुणगान कर भगवान आदिनाथ की आराधना की गई। इस दौरान धर्मावलंबियों में भक्ति का खूब रंग चढ़ा। भजनों की भक्ति बहाकर भगवन जिनेंद्र के समक्ष भक्तों को नृत्य सरोवर में डूबो दिया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया और मंदिर परिसर भक्तामर स्त्रोत की मधुर स्वर लहरियों से गूंज उठा। कार्यक्रम उपरांत भगवान आदिनाथ की संगीतमयी आरती उतारी गई।

Posted By: anil tomar

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