Gwalior Dharma Samaj News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। क्या हिंदू, क्या मुसलमान, क्या सिख और क्या कोई और धर्म। कोरोना का सितम हर किसी को बराबर झेलना पड़ रहा है। इस्लाम में सबसे पाक (पवित्र) माने जाने वाले माह-ए-रमजान में मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाती है, लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी कोरोना के कारण मस्जिदों में अकीदतमंद इबादत नहीं कर सके। केवल मस्जिद के व्यवस्थापक व मौलवी आदि ने ही वहां नमाज अदा की। नमाजियों ने घर में रहकर ही रमजान की विशेष नमाज अदा की। साथ ही अपने दोस्तों के बिना केवल स्वजनों के साथ ही सेहरी व अफ्तारी की।

हिंदुओं के चैत्र नवरात्र पर भी कोरोना का साया रहा, लेकिन फिर भी लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आई। शहर के सभी मंदिरों के पट चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन भी पूरी तरह से बंद रहे। ऐसे में श्रद्धालुओं ने अपने घर में रहकर ही पूजा-अर्चना की व अपने परिवार की सुखी रहने की कामना की। बुधवार को नवरात्र के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की। गौरतलब है कि इस साल चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल से शुरू हुए हैं, जो पूरे 9 दिन दिन, अर्थात 22 अप्रैल को तक रहेंगे। मान्यता है कि नवरात्रि में 9 दिन मां दुर्गा धरती पर रहती हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है।

काेराेना से मुल्क की हिफाजत के लिए मांगी दुआः रमजान के पहले दिन शहर की सभी प्रमुख मस्जिदों में विशेष नमाज ईमाम साहब द्वारा पांच लोगों की मौजूदगी में अदा कराई गई। मुस्लिम समाज के लोगों ने सुबह अजान से पहले सेहरी कर रोजे की नीयत बांधी। शाम को मगरिब की नमाज से पहले अफतार की दुआ मांगी और फिर अजान होने पर खजूर खाकर रोजा खोला। इसके बाद नमाज अदा की। सभी ने कोरोना से मुल्क की हिफाजत की दुआ मांगी। जीवाजीगंज ईदगाह, सुनहरी मस्जिद, घोसीपुरा स्थित नूर मस्जिद, ईदगाह कंपू , फूलबाग स्थित मोती मस्जिद, कंपू स्थित एक मीनार मस्जिद, हुजरात रोड स्थित मस्जिद रंगरेजान सहित सभी प्रमुख मस्जिदों में मगरिब की नमाज पांच लोगों द्वारा अदा की गई। शहरकाजी अब्दुल अजीज कादरी ने बताया कि रोजा यानी तमाम बुराइयों से परहेज करना। रोजे में दिनभर भूखा-प्यासा ही रहा जाता है। इसी तरह यदि किसी जगह लोग किसी की बुराई कर रहे हैं तो रोजेदार के लिए ऐसे स्थान पर खड़ा होना भी मना है। जब मुसलमान रोजा रखता है, तो उसके हृदय में भूखे व्यक्ति के लिए हमदर्दी पैदा होती है। जकात इसी महीने में अदा की जाती है। रोजा झूठ, हिंसा, बुराई, रिश्वत तथा अन्य तमाम गलत कामों से बचने की प्रेरणा देता है।

Posted By: vikash.pandey

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags