Gwalior Dharma Samaj News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। भौमवती अमावस्या पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना की। भौमी अमावस्या पर महिलाओं ने पीपल देवता का पूजन कर संतान की लंबी उम्र की कामना करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे भौमी अमावस्या कहते हैं।

सनातन धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है। सूर्य चंद्रमा जब एक ही राशि या पास वाली राशि में गोचर करते हैं तो भौमवती अमावस्या का योग बनता है। इस साल यह शुभ संयोग वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को बना। अमावस्या के दिन लोगों ने पितरों के लिए श्राद्ध व पूजा करने से सुख-समृद्धि की कामना की।

तालाबों में पहुंचकर किया स्नान: अमावस्या पर लोगों ने तालाबों में पहुंचकर स्नान किया। वहीं कई लोगों ने घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर उसमें स्नान किया। कोरोना से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर नहीं गए मान्यता है कि इस दिन स्नान और दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। अमावस्या के दिन पवित्र नदी या तालाब में स्नान करने से हजार गायों के दान के बराबर पुण्य मिलता है।

महिलाओं ने किया पूजन: अमावस्या के दिन महिलाएं स्नान के बाद मंदिर पहुंचीं स्नान के बाद महिलाओं ने नए मटके में पानी भरा। पानी के मटके के ऊपर महिलाओं ने चावल से भरा सकोरा रखा। महिलाओं ने मंदिरों में पहुंचकर पीपल के वृक्ष की पूजा की महिलाओं ने मटकों का पानी पीपल पर अर्पित किया और सूत बांधा। पितरों और देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए महिलाओं ने शुद्ध सात्विक भोजन बनाकर भोग लगाया।

Posted By: anil.tomar

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