Gwalior DNA Report News: बलबीर सिंह, ग्वालियर नईदुनिया। प्रदेश में डीएनए रिपोर्ट दुष्कर्म के केसों में बाधा बन गई हैं। सागर में 7 हजार 500 व भोपाल में 4 हजार 300 डीएनए रिपोर्ट लंबित हैं। एक महीने में दोनों लैब से 450 से 500 के बीच नई रिपोर्ट आ जाती हैं। इस कारण पुराने लंबित मामलों की संख्या नहीं घट रही है। इसका सीधा फायदा आरोपित को मिल रहा है। डीएनए रिपाेर्ट नहीं आने पर जमानत आसान हो गई है। गवाही के बाद डीएनए रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट में नहीं पहुंच रही है। साथ ही फरियादी से समझौता करने का भी मौका मिल रहा है। फरियादी अपने बयानों से पलट रही हैं। हाई कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट को लेकर सख्त रुख अपनाया, तो फारेंसिक साइंस लेबोरेट्री के रीजनल डायरेक्टर ने लंबित मामलों के संबंध में स्थिति स्पष्ट की है। जितनी रिपोर्ट तैयार करते हैं, उतने ही नए मामले रिपोर्ट के लिए आ जाते हैं। तीसरी लैब इंदौर में खोलने वाले हैं। फारेंसिक रिपोर्ट को लेकर कोर्ट काफी सख्त है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय भी खोलने का प्रस्ताव दिया है।

इसलिए अहम है डीएनए रिपोर्ट

-दुष्कर्म के मामलों में पीड़िता की गवाही प्रमुख है, लेकिन अधिकतर पीड़िताएं अपने बयान से मुकर रही हैं। उनके बयान से मुकरने के बाद आरोपित हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर करते है। इसी आधार पर जमानत मांगते हैं।

- यदि पीड़िता अपने बयानों से मुकर जाती हैं तो डीएनए रिपोर्ट सजा के लिए पर्याप्त है। डीएनए पाजिटिव आने पर जमानत मिलना मुश्किल हो जाता है।

- दुष्कर्म से जुड़े केसों की ट्रायल ज्यादा लंबी नहीं चलती हैं, क्योंकि इसमें गवाहों की संख्या सीमित होती है, लेकिन डीएनए रिपोर्ट नहीं आने पर ट्रायल लंबी खिंच जाती है।

- वर्तमान परिस्थियों को देखते हुए कोर्ट ने फारेंसिक साइंस विवि खोलने का प्रस्ताव दिया है। विवि से नए वैज्ञानिक निकलेंगे, लैबों में विशेषज्ञों की कमी है, उनकी पूर्ति होगी। जांच का आधार तकनीकी हो जाएगा।

Posted By: vikash.pandey

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