Gwalior DRDE News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सिटी सेंटर में रहने वाले लोगों को रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना (डीआरडीई) के 200 मीटर दाने की बंदिश हटने के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। डीआरडीई की मुख्य लैब की बाउंड्रीवाल से 50 मीटर की दूरी किए जाने की आधसूचना जारी करने कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने डीआरडीओ अध्यक्ष जी सतीश रेड्डी को पत्र लिखा। जिसका जवाब डीआरडीई ने दे दिया है।

डीआरडीई ने जवाब में कहा है कि महाराजपुरा में नई लैब के लिए प्रस्तावित 140 एकड़ जमीन का कब्जा दिलाया जाए। यहां पहले कब्जे भी हटाए जाएं। कब्जा दिलाने के तीन माह के भीतर 200 मीटर के को घटाकर 50 मीटर करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। नई लैब शिफ्ट हो जाएगी तब 50 मीटर दायरा भी खत्म कर दिया जाएगा।

आठ जून को लिखा पत्र: कलेक्टर ने डीआरडीई के अध्यक्ष को 28 जून को पत्र लिखा था। पत्र में लिखा कि डीआरडीई की बाहरी से 50 मीटर के अंदर 15 शासकीय संपत्तियों तरुण पुष्कर, ननि भवन, रूपसिंह स्टेडियम निगम वन विभाग रेलवे स्टेशन ट्रैक रेलवे पांच सरकारी बंगले एफसीलाई गोदाम, फायर विक्रेड स्टेशन आ रही है। उ से 50 मीटर की दूरी नापने पर इन संपत्तियों का नुकसान हो सुप्रीम कोर्ट के आवेश से पहले डीआरडीई रोड ग्वालियर को 140 एकड़ जमीन महाराजपुरा क्षेत्र में आवंटित की गई है, इसलिए इन संपत्तियों को बचाने डीआरडीई को बजाए मुख्य लैब से 50 मीटर की दूरी नापने पर इन्हें नुकसान होगा।

डीआरडीई का कलेक्टर को जवाब: यह है पूरा मामला भी सुनने के निर्देश दिए। इसी बीच माननीयों की पहल पर संपत्तियों को बचाने शासन से डीआरडीई की क्रिटिकल लैब शिफ्ट करने महाराजपुरा में 140 एकड़ जमीन आवंटित कराई। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट के ऑर्डर पर स्टे दे दिया। सिटी सेंटर में डी आरडीई ग्वालियर की लैब है। इसके 200 मीटर में निर्माण पर रोक थी। दायरे में करीब 10 हजार करोड़ की सरकारी व निजी संपत्तिया आ रही है। यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।

Posted By: anil.tomar

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