Gwalior Education News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना के कारण बीते साल से आनलाइन क्लास का महत्व बढ़ गया है। प्राइवेट हों या सरकारी, सभी स्कूलों द्वारा बच्चों को आनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। मगर शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत इंग्लिश मीडियम विद्यार्थियों की मुसीबत आनलाइन क्लास के कारण बढ़ गई है। दरअसल स्कूली बच्चों को पढ़ाने के लिए शासन के निर्देशानुसार वाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। जिनमें विद्यार्थियों की पढ़ाई हेतु लिंक, वीडियो समेत तमाम पाठ्य सामग्री भेजी जाती है। मगर यह संपूर्ण पाठ्य सामग्री हिंदी में ही होती है। जिसके कारण इंग्लिश मीडियम विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खास बात यह है कि इंग्लिश मीडियम विद्यार्थियों को शासन से मिलने वाली निशुल्क पुस्तकों का वितरण भी अभी तक नहीं किया गया है। जिसके कारण विद्यार्थियों की परेशानी में कई गुना इजाफा हो गया है। शिक्षकों द्वारा भी इंग्लिश मीडियम विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान किया जाना सुनिश्चित नहीं हो रहा है।

शासकीय पद्मा कन्या विद्यालय के प्राचार्य अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि स्कूल में करीब 40 फीसद विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करते हैं। यह सच्चाई है कि इंग्लिश मीडियम विद्यार्थियों को इन दिनों थोड़ी असुविधा उठानी पड़ रही है। क्योंकि सारी पठन सामग्री भोपाल से बनकर आती है, जिसे वाट्सएप ग्रुप में डाला जाता है। यह सभी सामग्री हिंदी में ही होती है, अंग्रेजी में आती ही नहीं है। हालांकि विद्यार्थियों की सहायता के लिए शिक्षकों द्वारा विभिन्न विषयों की पठन सामग्री अंग्रेजी में तैयार की जाती है, मगर फिर भी कुछ विषयों को पढ़ाने में परेशानी हो रही है। आनलाइन पढ़ाई कराने के लिए शिक्षक वाट्सएप पर ही नोट्स तैयार कराते हैं और उनकी जांच भी करते हैं। इंग्लिश मीडियम के विद्यार्थियों को निशुल्क मिलने वाली किताबें नहीं मिल सकी है, ऐसे में उन्हें ई-बुक उपलब्ध करा दी गई हैं।

Posted By: vikash.pandey

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