Gwalior Education News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सीबीएसई 12वीं की परीक्षा को लेकर बना संशय मंगलवार को शाम ढलने के साथ खत्म हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आवश्यक बैठक में परीक्षा को रद करने का फैसला लिया। अब सुप्रीम कोर्ट ने तीन जून तक बोर्ड से आगे की प्रक्रिया को लेकर जवाब मांगा है। इस विषय को लेकर शहर के स्कूल प्राचार्यों ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि परीक्षा रद होने से शैक्षणिक सत्र अधिक लेट नहीं होगा। दूसरे नजरिए से सोचा जाए तो इसमें कमजोर को छोड़कर पढ़ने वाले विद्यार्थियों का थोड़ा सा नुकसान हुआ है, क्योंकि 12वीं के बाद उनके लिए आगे का रास्ता साफ होता है। इसके अलावा विद्यार्थी की रुचि निकलकर सामने आती है और मन में स्पर्धा का भाव बरकरार रहता है। हालांकि इस फैसले से विद्यार्थी और उनके अभिभावकों के दिमाग से परीक्षा का तनाव घटेगा। वे कूल होकर आगे की तैयारी कर सकेंगे। वहीं विद्यार्थियों का कहना है उन्होंने अपनी तैयारी को एक तरह से रेस माना। उनकी रेस किसी और से नहीं, खुद के साथियों से थी। उनके हाथ से यह मौका फिसल गया है, मगर वे खुश हैं।

विद्यार्थियों के हित में रहा फैसलाः सीबीएसई सिटी कोआर्डिनेटर डा.माधव देव सारस्वत ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री ने काफी सोच समझकर विद्यार्थी और उनके अभिभावकों के हित में फैसला लिया है। अगर परीक्षा होती तो शायद कमजोर विद्यार्थियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता। आगे बोर्ड 10वीं के साथ 12वीं के विद्यार्थियों को पुरानी परफार्मेंस के आधार पर जज करके परिणाम घोषित करेगा। बस बोर्ड की माडरेट पालिसी का इंतजार है।

खुद को साबित करने का मौका फिसलाः सिंधिया कन्या विद्यालय की प्राचार्य निशि मिश्रा का कहना है विद्यार्थियों को तनाव से दूर रखने का इसे अच्छा फैसला माना जा सकता है, लेकिन उनके हाथ से खुद को साबित करने का मौका फिसल गया है। स्कूल में कोई एक विद्यार्थी हाेशियार नहीं होता और भी होते हैं। इस निर्णय के आगे चलकर कुछ नुकसान भी सामने आएंगे।

विद्यार्थियों को तनाव से मिला छुटकाराः सहोदया अध्यक्ष राजेश्वरी सावंत ने बताया कि वार्षिक परीक्षा रद होने से विद्यार्थियों को तनाव से छुटकारा मिला है। अब बोर्ड किस तरह से अंक देगा, यह उसकी माडरेट पालिसी से स्पष्ट होगा। इस फैसले का विद्यार्थियों को आगे चलकर थोड़ी सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

हमारे मूल्यांकन का अर्द्धवार्षिक नहीं, वार्षिक परिणाम आधारः12वीं के विद्यार्थी साहिल सिद्धानी का कहना है प्रधानमंत्री का फैसला हमारी सेहत के लिहाज से ठीक है, लेकिन ऐसा लग रहा है वे ग्रेड नहीं बना पाएंगे। वे साल भर रेस में दौड़ने की तैयारी में जुटे हुए थे। दिन-रात की मेहनत पर पानी फिर गया है। साल भर दी गईं परीक्षाओं में अंकों का हमारे मस्तिष्क पर प्रभाव नहीं पड़ता है, जितना वार्षिक परिणाम से पड़ता है, क्योंकि मूल्यांकन का आधार यही परीक्षा रहती है। एक और छात्र आयुष अग्रवाल ने बताया फैसले के बाद उन्होंने राहत की सांस ले ली है, मगर उनके हाथ से खुद से जुड़ा एक चांस निकलकर गया है। इसके लिए उन्हें हमेशा खेद रहेगा।

Posted By: vikash.pandey

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