Gwalior Education News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोविड 19 के इस दौर में सबसे ज्यादा हम आक्सीजन के लिए त्राहिमाम कर रहे थे, जबकि आक्सीजन तो प्रकृति प्रदत्त है। अभी भी हमें सीख लेनी चाहिए और ये सोचना चाहिए कि जितने ज्यादा से ज्यादा पौधे हम लगा सकें, उससे हम मानव जीवन की रक्षा कर सकते हैं। इस बार पर्यावरण की थीम परिस्थितिकी तंत्र की बहाली यानी ईकोसिस्टम रिस्टोरेशन है। जिसका अर्थ है कि जितना भी पर्यावरण खराब हुआ है। उसे रिस्टोर करने के लिए संरक्षण करना। जिसमें हम पाैधाराेपण कर सकते हैं, जलवायु प्रदूषण रोक सकते हैं। जिन भी चीजों से पृथ्वी का क्षरण हुआ है, उसके रिस्टोर के लिए काम करना चाहिए। प्रकृति स्वयं भी समय रिस्टोर करने के लिए काम करती है। यह कहना था पर्यावरणविद, हिमालयी पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन देहरादून के पद्मभूषण डा. अनिल प्रकाश जोशी का। वे सोमवार को आइटीएम यूनिवर्सिटी में अनुपम मिश्र स्मारक व्याख्यान में उपस्थित सदस्यों को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कई जागरूकता अभियानों के बाद पर्यावरण के लिए हम थोड़ा सा जागरूक हुए हैं, लेकिन अब भी पर्यावरण से खतरा टला नहीं है। हाल ही में एक मुद्दा काफी गर्माया हुआ है कि अब बुंदेलखंड के छतरपुर में हीरों की खदान में खुदाई के लिए करीब दो लाख 15000 पेड़ काटे जाने की तैयारियां है। बुंदेलखंड के कई संगठन और मीडिया इसे प्रमुखता से उठा रहे हैं। ये सब इसलिए क्योंकि छतरपुर जिले के बकस्वाहा में हीरे की खदान बताई जा रही है। इस दौरान आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर केप्रो वाइस चांसलर डा. एसके नारायण खेड़कर आदि मौजूद थे।

Posted By: vikash.pandey

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