Gwalior Effect of rising diesel prices: ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। डीजल के दाम 100 रुपये लीटर के ऊपर पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में बस आपरेटरों ने भी बस के किराये में 50 फीसद की बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है। आपरेटरों ने किराया बढ़ोतरी के लेकर परिवहन विभाग को अवगत करा दिया है। आपरेटरों की इस मांग पर इस महीने किराया बोर्ड की बैठक हो सकती है। बस आपरेटरों का कहना है कि जब किराये में 25 फीसद की बढ़ोतरी की थी, तब डीजल 89 रुपये लीटर था। अब डीजल 102.14 रुपये हो गया है।

परिवहन विभाग ने अप्रैल 2021 में बसों के किराये में बढ़ोतरी की थी। 1 रुपये प्रति किमी से बढ़ाकर किराया 1.25 रुपये प्रति किमी कर दिया। जब यह किराया बढ़ाया गया था, तब आपरेटरों ने 50 फीसद की मांग थी। लेकिन विभाग ने 25 फीसद ही बढ़ाया था। किराया बढ़ोतरी की अधिसूचना जारी हुई थी, तब डीजल 89 रुपये लीटर था। तबतक अबतक 13.14 रुपये बढ़ बढ़ चुके हैं। कोविड की वजह से बस में ट्रेफिक भी कम है। बसों को जो ट्रेफिक मिलना चाहिए, वह नहीं मिल रहा है। डीजल 100 रुपये लीटर के पार होने पर फिर से किराया बढ़ोतरी पर जो दे रहे हैं। इसको लेकर विभाग को अवगत करा चुके हैं। बस आपरेटरों का कहना है कि यदि विभाग नहीं बढ़ाता है तो खुद से बढ़ा लेंगे। वर्तमान परिस्थित में किराये डीजल का भी खर्च नहीं निकल रहा है।

एक लीटर 3.50 किमी चलती है बस

-बस एक लीटर में साढ़े तीन किलो मीटर का एवरेज देती है। तीन से साढ़े तीन किलो मीटर बस चलाने पर ईधन पर 100 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा हाइवे पर टोल टैक्स अलग से देना पड़ रहा है।

- टायर भी महंगे हो गए हैं। स्टाफ का खर्च का भी बोझ बढ़ा है। टायर की 42 हजार की जोड़ी आ रही है।

- बसों में अभी 70 से 90 फीसद तक ही ट्रेफिक जा रहा है। जो बसें जा रही हैं, वह डीजल का भी खर्च नहीं निकाल पा रही हैं। यदि ग्वालियर से शिवपुरी की वापसी में 7 हजार का डीजल खर्च करना पड़ रहा है।

इनका कहना है

50 फीसदी किराया बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन 25 फीसदी किराया ही बढ़ाया। डीजल के दाम बढ़ चुके हैं। इसे बस चलाना मुश्किल हो रहा है। किराया बढ़ाने लेकर परिवहन विभाग को अवगत करा चुके हैं। इस महीने किराया बोर्ड की बैठक बुलाने पर चर्चा हुई है।

पदम गुप्ता, महामंत्री म.प्र. रोडवेज

Posted By: anil.tomar

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