ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जेएएच परिसर स्थित सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल में शनिवार को लगी आग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। भवन निर्माण में उपयोग की सामग्री संदेह के घेरे में आ गई है। अचरज की बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकार के अनुदान से तैयार किए गए इस हास्पिटल को आधिकारिक रूप से जेएएच को हस्तांतरित भी नहीं किया है। चार मंजिला इमारत को केंद्र सरकार की एचएससीसी कंपनी ने 70 करोड़ की लागत से बनाया है। इसमें 178 बेड है।

दरअसल इस अस्पताल का निर्माण उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किया गया था। इस साल के आरंभ में इसका निर्माण लगभग पूरा भी हो गया था। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ की भर्ती की जा रही थी, लेकिन मार्च में अचानक कोरोना ने दस्तक दे दी। तब प्रशासन ने इसे कोविड हास्पिटल बना दिया। कोरोना काल में गंभीर मरीजों को यही रखा गया। अभी यहां मरीज भर्ती हैं। वजह, सिर्फ इसी हास्पिटल में 54 वेंटिलेटर मौजूद हैं। आइसीयू हैं। शनिवार को चौथी मंजिल पर बने आइसीयू में आग लग गई। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि वह नगर निगम फायर एनओसी ले चुका है। इसके बावजूद शार्ट सर्किट से आग लगी।

पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने जताई थी नाराजगीः पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजय लक्ष्मी साधाै जब ग्वालियर में सुपर स्पेशियलिटी का निरीक्षण करने आईं थी ताे काम की घटिया गुणवत्ता काे लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। साथ ही अस्पताल प्रबंधन काे निर्देश दिए थे कि जब तक काम सही नहीं हाे जाता तब तक इमारत काे हेंडआेवर नहीं लिया जाए। इसके बाद जब काेराेना संकट खड़ा हुआ ताे मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इसे काेविड अस्पताल बनाकर शुरू करवा दिया।

Posted By: vikash.pandey

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस