Gwalior flood relief work: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बाढ़ की तबाही के बाद सरकार ने अपने बाढ़ प्रभावित गांवों का सर्वे कराया और सर्वे के बाद बाढ़ पीड़ितों को आपदा राहत भी बांटी। प्रशासन की टीमों द्वारा कराए गए सर्वे पर बाढ़ पीड़ितों ने भेदभाव और चेहरे देखकर सर्वे करने जैसे आरोप लगाए और ग्राम पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक सर्वे में गड़बड़ी करने की शिकायतें की गई। बाढ़ पीड़ितों ने फिर से सर्वे कराए जाने की मांग करते रहे। इस तरह की समस्याओं को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिले के 46 गांवों सहित सभी पंचायतों में ग्राम सभा आयोजित कराई, लेकिन इन ग्राम सभाओं में बाढ़ पीड़ितों ने कई तरह की शिकायतें गिनाईं। पवाया पंचायत के बाढ़ पीड़ितों ने कहा कि बाढ़ में घर ढहने के बाद सरकार ने उनको पैसे दे दिए हैं लेकिन यह पैसे उनके खातों में आए नहीं हैं तो अब क्या करें और कहां जाएं। बताया गया कि पवाया में 93 लोगों को आपदा राहत मिलनी है, लेकिन इनमें से 25 से 30 लोगों को छोड़कर घर बनाने की राशि उनके खातों में नहीं पहुंची है। अब जो सरकार 5 या 10 हजार रुपए दिए हैं उनसे कैसे व्यवस्थाएं संभालें। इधर सिसगांव पंचायत के सिली सिलेटा और सेमरी गांव के बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि बाढ़ ने उनके घरों को तबाह कर दिया, लेकिन आपदा राहत उनको नहीं मिल सकी है। आज भी लोग परेशानी की जिंदगी जीने पर मजबूर हैं। जो खंबे टूट गए थे वह टूटे ही पड़े हैं। इधर पिछोर क्षेत्र की लिधौरा पंचायत में बाढ़ पीड़ितों ने हंगामा कर दिया। बाढ़ प्रभावित गांवों में जो सर्वे कराया गया था उस सर्वे सूची को ग्रामीणों के बीच पढ़कर सुनाया गया। साथ ही सर्वे सूची गांवों में चस्पा कराई गईं। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने दावे आपत्ति भी मांगे और कहा कि अगर किसी को ऐसा लगता है कि उसका नुकसान बाढ़ से हुआ है और उसका नाम सर्वे में छूट गया है तो वह आवेदन कर सकता है। उल्लेखनीय डबरा, भितरवार और मोहना क्षेत्र के 46 गांवों में बाढ़ ने तबाही मचाई थी।

Posted By: vikash.pandey

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