Gwalior Ganesh Utsav News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भगवान को हमने फोटो या मूर्ति के रूप में जैसा देखा वैसी ही कल्पना की। यही वजह है मूर्तिकार भी समय के हिसाब से इन्हें अपने हिसाब से आकार देते आ रहे हैं। इस गणेश उत्सव भी बप्पा के विविध रूप शहर में देखने को मिल रहे हैं। विघ्नहर्ता कहीं मूसक की सवारी करते नजर आ रहे हैं, तो कहीं वे मूर्ति में गिटार बजाते हुए दिख रहे हैं। इतना ही कुछ मूर्तियों में बप्पा मोदक के सामने विराजे हुए हैं। वर्षों से उत्सव में लीन आयोजकों का कहना है वे हर हाल में गणेशोत्सव पर कार्यक्रम रखते हैं। हर साल बप्पा की मनमोहक मूर्ति ले कर आते हैं। इस बदलाव से बाल मन पर अलग प्रभाव पड़ता है। बच्चे सुबह-शाम उत्सव का हिस्सा बनते हैं।

जलझूलनी डोल ग्यारस कल

देशभर में शुक्रवार को परिवर्तनीय एकादशी मनाई जाएगी। इसे जलझूलनी डोल ग्यारस एकादशी भी कहा जाता है। इसी दिन से भगवान गणेश के विसर्जन की शुरुआत होती है, जो अनंत चतुर्दशी तक चलती है। देवशयनी एकादशी में भगवान विष्णु चार महीने के लिए सो जाते हैं। सोए हुए भगवान विष्णु देवउठनी एकादशी के दिन जागृत होते हैं, लेकिन इन चार महीनों के बीच एक ऐसा समय आता है, जब भगवान विष्णु सोए हुए करवट बदलते हैं। ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी के अनुसार भादौ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन भगवान विष्णु करवट लेते हैं। भक्त वामन भगवान की पूजा करते हैं। हिंदू पंचांग में एकादशी तिथि 16 सितंबर को सुबह 9:37 से शुरू होगी।

Posted By: anil.tomar

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