Gwalior Gaushala News: विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। गायों को सिर्फ माता बोलने से कुछ नहीं होता, मां शब्द, इसके विचार व इस्तेमाल को हमें स्वीकारना होगा। हम कुत्ते पालते हैं, कई ब्रीड पालते हैं, यह अब फैशन में आ गया है। मगर हम वह भूल गए जो हमारे दादा, परदादा करते थे। गायों के प्रति सहानुभूति रखिए, उनका सम्मान कीजिए। सड़क पर वाहन चला रहे हैं, तो ठीक से चलाएं, गायों की रक्षा कीजिए।

मंगलवार को लाल टिपारा गोशाला आए डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर सौरभ गुर्जर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए यह बात कही। युवाओं को संदेश देते हुए सौरभ ने कहा कि युवा ही देश की धड़कन है, भारत एक युवा देश है। युवाओं को थोड़ा गंभीर होना होगा। अपनी सेहत के प्रति, अपने देश की संस्कृति व सभ्यता के प्रति। हम आगे बढ़ते हैं तो अपनी संस्कृति व सभ्यता को भूल जाते हैं। मैं यूएस में जाकर डब्ल्यूडब्ल्यूई लड़ता हूं, वहां मैंने अपनी संस्कृति को नहीं छोड़ा। वहां मुझे बहुत मुश्किलें आ रही हैं। उन्हाेेने कहा कि मैं टीका लगाकर क्यों लड़ता हूं, क्यों रुद्राक्ष पहनता हूं। मेरे पास काम नहीं होगा, चलेगा। मगर मैं अपनी संस्कृति सभ्यता को नहीं छोड़ सकता। युवाओं से मेरा कहना है कि अपनी जड़ों को न भूलें, हमारी संकृति-सभ्यता ही हमारी जड़ें हैं, जिसे हम भूल जाएंगे तो आगे नहीं जा पाएंगे। बचपन का एक किस्सा सुनाते हुए सौरभ ने कहा कि जब में छोटा था तो एक गाय मर गई थी, पहले गाय को मर जाने के बाद गांव से बाहर फेंक आते थे, मगर मैं और मेरी बहन इतना रोये कि मेरे दादा ने एक गड्ढा खोदकर उसमें गाय के शव काे गाढ़ा और चबूतरा बना दिया। हम कई दिनों तक उस पर फूल चढ़ाते रहे। सौरभ ने पर्यावरण संरक्षण की अपील करते हुए कहा कि बारिश का मौसम है, खूब पौधे लगाइए। सभी ने देखा है कि हमें कोरोना के कारण आक्सीजन की कितनी कमी हुई थी। हम अभी भी नहीं सुधरे तो कभी नहीं सुधर सकते।

Posted By: vikash.pandey

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