Gwalior Health News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जेएएच व कमलाराजा अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में भर्ती मरीजों को इलाज देना इन दिनों मुश्किल हो रहा है। क्योंकि वार्ड में आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। पिछले दो सप्ताह से मेडिसिन वार्ड में वे आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं जिनसे मरीज का इलाज किया जा सके। यही कारण है कि इलाज करने वाले डाक्टर परेशान हैं। क्योंकि वह मरीज से अस्पताल के बाहर से दवा मंगा नहीं सकते। साथ ही अस्पताल प्रबंधन से दवा उपलब्ध कराने के लिए जोर आजमाइश कर नहीं सकते। ऐसे में मरीज के ठीक नहीं होने की दशा में अटेंडेंटों की खरी खोटी सुनना पड़ रही है तो बाहर से दवा मंगवाने पर सीएम हेल्पलाइन की परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसे में डाक्टर परेशान हैं कि आखिर करें तो क्या करें। क्योंकि आवश्यक दवाओं की अनुपलब्धता में मोनोसेफ दवा से मरीज ठीक नहीं हो पा रहे हैं। इलाज देने वाले डाक्टरों का कहना है कि मरीज के शरीर के अंदर का संक्रमण रोकने के लिए आवश्यक एंटीबायोटिक दवा पिछले एक माह से उपलब्ध नहीं है।

संक्रमण रोकने में यह दवाएं कारगर

शरीर में फैले संक्रमण को रोकने के लिए मेरोपेनम, पाइपेरासिलिन ताजोबैक्टम, लिवोफ्लॉक्सासिन, एमोक्सीक्लैव, मेट्रोनिडाजोल, सिप्रोफ्लोक्सासिन, क्लींडामाइसिन, पेरासिटामोल टैबलेट, पैंटोप्राजोल इंजेक्शन, ओंडैनसैटरोन इंजेक्शन, सेफोपेराजोन सल्बैक्टम इंजेक्शन की आवश्यकता होती है, लेकिन यह दवाएं पिछले दो सप्ताह से उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा खून जमने की शिकायत को दूर करने वाला एलएमडब्ल्यूएच (हिपेरिन) भी उपलब्ध नहीं है। शरीर के अंदर किसी भी अंग में संक्रमण को रोकने में इन दवाओं की मुख्य भूमिका होती है, लेकिन यही दवाएं अस्पताल से नदारत हैं, जिसके कारण डाक्टर व मरीज परेशान हैं।

इन दवाओं की कमी सभी स्थानों पर

जयारोग्य अस्पताल में दवाओं की कमी के कारण भर्ती मरीज ठीक नहीं होते और उसका लाभ निजी अस्पताल के दलाल उठाते हैं। क्योंकि वह मरीज व उसके अटेंडेंट को गुमराह कर निजी अस्पताल में शिफ्ट कराने में कामयाब हो जाते हैं। माधव डिस्पेंसरी के समाने स्थित निजी अस्पताल में भर्ती मरीज के अटेंडेंट मुरैना के राजीव का कहना था कि उनके चाचा का इलाज दो दिन जेएएच में चला, लेकिन वहां पर दवा भी नहीं मिल रही थी और कोई मरीज पर ध्यान भी नहीं दे रहा था इसलिए निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

आपके द्वारा बताई गई सभी दवाएं स्टोर में मौजूद हैं। वार्ड में दवा उपलब्ध कराने के लिए संबंधित वार्ड की सिस्टर इंचार्ज की जवाबदारी होती है। यदि किसी भी वार्ड में दवा उपलब्ध नहीं है तो इसकी जांच कर, लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। डा.देवेंद्र कुशवाह, प्रवक्ता जयारोग्य अस्पताल

Posted By: anil.tomar

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