Gwalior Health Tips: अजय उपाध्याय,(ग्वालियर नईदुनिया)। मानसून की विदाई की बेला है, लेकिन अब भी जब-तब वर्षा की बाैछारें शहर काे भीगा रही हैं। कभी वर्षा ताे कभी धूप का निकलना लाेगाें की सेहत बिगाड़ रहा है। ये माैसम लाेगाें काे संक्रमण का शिकार बना रहा है। इन दिनाें अस्पतालाें में त्वचा, पेट और आंखाें के संक्रमित मरीजाें की संख्या बढ़ गई है।

दरअसल वर्षा के बीच धूप खिलने से कई तरह के बैक्टीरिया फैलने लगते हैं। यह उतार-चढ़ाव का मौसम है। कभी तेज गर्मी, तो कभी वर्षा के साथ हल्की सर्दी का अहसास अधिक परेशान करने वाला होता है। ऐसे मौसम में तरह-तरह के बैक्टीरिया और वायरस की सक्रियता बढ़ जाती है और लाेग संक्रमण की चपेट में आते हैं। त्वचा, पेट और आंखों के संक्रमण इस मौसम में खासतौर से दिखाई देते हैं। ऐसे मौसम में बच्चों को संभालने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, क्योंकि थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ी आसानी से उन्हें संक्रमण का शिकार बना सकती है। जाहिर है कि मानसून के इन दिनों में कुछ अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है। उमस भरी गर्मी, नमी और कीचड़ के चलते बरसात के इस मौसम में त्वचा का संक्रमण कभी भी परेशान कर सकता है। बैक्टीरिया, वायरस, फंगस या पैरासाइट, त्वचा संक्रमण की खास वजह होते हैं। देर तक पानी में पैर रहें, तो अंगुलियों के बीच फंगल संक्रमण का असर दिखाई दे सकता है। इसमें दो अंगुलियों के बीच की जगह सफेद होने लगती है, सड़न के साथ दुर्गंध आती है। नाखूनों में भी संक्रमण हो सकता है। नाखून में गंदगी भरने से उसमें दर्द होने लगता है। पानी में पैर अधिक रहने पर खाल निकल जाती है और अंदर का हिस्सा दिखाई देने लगता है, जिसमें खुजली अधिक होती है। इससे संक्रमण और तेजी से फैलता है। त्वचा में बैक्टीरिया संक्रमण होने पर फोड़े-फुंसियों की समस्या पैदा हो जाती है। जैसे दाद, खाज, खुजली की समस्या, त्वचा का रंग बदलना, त्वचा का खुरदुरापन और धब्बे पड़ना, उमस भरे वातावरण में त्वचा की एलर्जी आदि हो जाती है। इसलिए वर्षा में भीगने से बचना चाहिए, क्योंकि वर्षा के मौसम में गीले कपड़े पहनने से कई तरह के त्वचा रोग हो जाते हैं।

Posted By: vikash.pandey

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