-चिकित्सा अधिकारी के पद पर भर्ती का मामला

ग्वालियर, (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने उस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार दिया, जिसमें याचिकाकर्ता ने चिकित्सा अधिकारी की भर्ती पर एक साल का समय मांगा था। 2022 तक याचिकाकर्ता की पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी नहीं की है। पद को एक साल से ज्यादा समय तक खाली नहीं रखा जा सकता है। चिकित्सकों कमी है।

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2021 में चिकित्सा अधिकारी की भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। दिव्यानी अहरवाल ने परीक्षा पास की। परीक्षा पास करने के बाद दिव्यानी ने आवेदन दिया कि उसे वर्ष 2023 तक का समय दिया जाए, जिससे उसकी पोस्ट ग्रेजुएशन हो जाए। आयुक्त स्वास्थ्य संचनालय ने दिव्यानी के आवेदन को खारिज कर दिया। प्रदेश में चिकित्सकों की कमी है। ऐसी स्थिति में ज्यादा दिनों तक पद खाली नहीं रखा जा सकता है। दिव्यानी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उसकी ओर से तर्क दिया गया कि चिकित्सा अधिकारी की परीक्षा पास की है। उसे अपनी पीजी की पढ़ाई पूरी करना है। ऐसी स्थिति में उसे 2023 तक की छूट दी जाए। पीजी पूरी होने के बाद नौकरी ज्वाइन कर सकती हैं। राज्य लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता रवींद्र दीक्षित ने तर्क दिया कि 2022 तक पीजी की डिग्री पूरी होना चाहिए। साथ ही चिकित्सकों की काफी कमी है। ऐसी स्थिति में पद को लंबे समय तक खाली नहीं रखा जा सकता है। आयुक्त ने याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज करने में कोई गलती नहीं की है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी।

नेशनल लोक अदालत 13 अगस्त कोः प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष प्रेम नारायण सिंह ने शनिवार को न्यायिक अधिकारियों की बैठक ली। इस बैठक में 13 अगस्त को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए। नेशनल लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा, एनआइ एक्ट एवं बिजली के लंबित प्रकरणों में राजीनामा के माध्यम से अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया जाए। लोक अदालत का प्रसार-प्रचार भी किया जाए, जिससे पक्षकार आपसी समझौते योग्य केसों को लोक अदालत में निराकृत कर सके। बैठक में गालिब रसूल अपर जिला न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भी उपस्थित रहे।

Posted By: vikash.pandey

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