-अशोकनगर विधायक जज्जी के निर्वाचन का मामला

ग्वालियर,(नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने गुरुवार को अशोकनगर विधायक जजपाल सिंह के खिलाफ दायर चुनाव याचिका की सुनवाई की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संगम जैन को आदेश दिया है कि ये साबित करें, कि जज्जी ने अलग-अलग जाति प्रमाण पत्र पर चुनाव लड़ें, कौन से चुनाव थे और कब-कब लड़े हैं। वहीं प्रतिवादी जगदीश भंडारी को अपना जवाब पेश कर दिया। उसने याचिका को औचित्यहीन बताया है। चुनाव 2018 में हुए और याचिका 2019 में दायर की है। एक नवंबर को याचिका की फिर से सुनवाई होगी।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में जजपाल सिंह जज्जी ने कांग्रेस के टिकट से अशोकनगर विधानसभा सीट से चुनाव जीत गए थे। भाजपा से लड़्डू राम कोरी चुनाव हार गए। चुनाव हारने के बाद कोरी ने हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की। इस याचिका में जज्जी का चुनाव शून्य घोषित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जज्जी ने अलग-अलग जाति प्रमाण पत्र पर चुनाव लड़ा है, जैसे चुनाव लड़ने के लिए जैसे जाति प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती है, वैसा बनवाते थे। चुनाव लड़ते थे। इसलिए चुनाव शून्य किया जाए। दावे आपत्तियों के निराकरण के लिए कोर्ट पूरे मामले को गवाही के लिए लगा दिया है। सभी आपत्तियों का निराकरण करते हुए कोर्ट ने जज्जी से गवाहों की सूची मांगी थी, लेकिन उनकी ओर से सूची नहीं आए। वर्ष 2018 में जितने भी उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, उन्हें प्रतिवादी बनाया था। जगदीश भंडारी ने अपना पक्ष रखने की इच्छा जताई। शेष नौ प्रतिवादियों के अधिकार समाप्त कर दिए। भंडारी ने अपना जवाब पेश कर दिया।

तीन गांजा तस्करों को पांच-पांच साल की सजाः विशेष सत्र न्यायालय ने तीन गांजा तस्करों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपितों को सजा काटने के लिए जेल भेज दिया। अपर लोक अभियोजक धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि क्राइम ब्रांच के उपनिरीक्षक विवेचना करके डबरा से लौट रहे थे। तभी महाराज बाड़े से मुखबिर ने सूचना दी कि तीन संदिग्ध व्यक्ति गांजा लिए हैं और उसे बेचना चाह रहे हैं। मुखबिर के बताए स्थान पर पुलिस ने घेराबंदी की। लाला उर्फ साकिर, उसकी पत्नी सरस्वती एवं आशिक को पकड़ लिया। उनके पास से सात किलो गांजा जब्त किया गया। पुलिस ने जांच के बाद न्यायालय में चालान पेश किया। कोर्ट ने तीनों आरोपितों को सजा सुनाई। सरस्वती का पांच साल का बेटा था। वह भी न्यायालय में उपस्थित हुआ। बेटा मां को नहीं छोड़ रहा था, उसे समझाने के बाद स्वजनों के साथ भेज दिया। साकिर, सरस्वती व आशिक को जेल भेज दिया।

Posted By: vikash.pandey

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