ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने उस मामले में फिर से हलफाना मांगा है, जिसमें फारेंसिक साइंस लेबोरेट्री ने कहा था कि उनके पास किट नहीं है। इसलिए डीएनए रिपोर्ट नहीं सकी। इस मामले में लैब से पूछा गया है कि जब किट नहीं थी तो रिपोर्ट कैसे तैयार की गई। किट कहां से आई। साथ ही डीजीपी बताएं कि शासन से किट का प्रस्ताव कब भेजा था।

हरिओम को दुष्कर्म के मामले में दतिया जिले के भांडेर थाने ने गिरफ्तार कर लिया था। उसने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि डीएनए रिपोर्ट नहीं आई है। इससे ट्रायल संभव नहीं है। इसलिए जमानत पर छोड़ा जाए। कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट के संबंध मे जवाब मांगा तो लैब की ओर से बताया गया कि किट नहीं है। इसलिए रिपोर्ट लेट हो रही है। कोर्ट ने डीजीपी से शपथ पत्र मांगा। गुरुवार को डीजीपी का शपथ पत्र भी आ गया। साथ ही डीएनए रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश हो गई। डीजीपी ने बताया कि किट के लिए टेंडर जारी किए गए हैं। 12 दिसंबर तक ये प्राप्त हो जाएगी। कोर्ट ने डीपीजी से फिर से शपथ पत्र मांगा है। साथ ही डीएनए किट नहीं थी तो रिपोर्ट कैसे तैयार की। इसे भी समझाया जाएगा। कोर्ट ने आरोपित को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।

जमानत राशि जब्त कर लगाया 10 हजार रुपये का हर्जानाः हाई कोर्ट की एकल पीठ ने एक आरोपित की जमानत राशि जब्त करने के साथ-साथ दस हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाने की राशि से कोर्ट परिसर की डिस्पेंसरी का विकास किया जाएगा। लालू पंडित पर पोक्सो, डकैती अधिनियम के तहत थाटीपुर थाने में केस दर्ज है। कोर्ट ने उसे शर्तों पर जमानत दी थी, लेकिन उसने शर्तों का पालन नहीं किया। इसके चलते उसका गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया। आरोपित ने फिर जमानत याचिका लगाई। इसे कोर्ट ने गंभीर मानते हुए उसकी पूर्व में भरी जमानत जब्त करने के निर्देश दिए और10 हजार का हर्जाना लगाया है। उसे दोबारा एक लाख रुपये की जमानत पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं।

Posted By: vikash.pandey

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