ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मुझे इस बात का गम है कि मेरा नाम बम है, मैं हर बार यूं ही छला गया हूं। बिस्मिल के हाथ से निकला और हिजबुल के हाथ चला गया हूं। ये और ऐसी ही ओजपूर्ण रचनाओं ने रंगमहल में मौजूद शहरवासियों को शीतलहर के बावजूद कड़ाके की ठंड का अहसास तक नहीं होने दिया। अवसर था चैंबर ऑफ कॉमर्स के दीपावली मिलन समारोह के तहत आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का। देर शाम शुरू हुई कवियों की रचनाओं ने आधी रात तक श्रोताओं को कुर्सी से हिलने तक नहीं दिया।

समारोह में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कवियों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम से पूर्व चैंबर के अध्यक्ष विजय गोयल और मानसेवी सचिव प्रवीण अग्रवाल ने कवियों का स्वागत किया। रंगमहल में चैंबर ऑफ कॉमर्स के दीपोत्सव पर आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ इंदौर से आई कवियत्री डा भुवन मोहिनी ने सरस्वती वंदना से की। इसके बाद आगरा के कवि रमेश मुस्कान ने देशी नायिका का माडल नायिका से संवाद की प्रस्तुति इन पंक्तियों के साथ की... तुम फैशन टीवी सी लगती, मैं संस्कार का चैनल हूं। तुम मिनरल वाटर की बोतल, मैं गंगा का पावन जल हूं। तुम करो गाड़ियों की मांगें, मैं पांव-पांव चलने वाला, तुम हैलोजन सी जलती हो, मैं दीपक सा जलने वाला। चमक-दमक वाला तुमको संसार नहीं दे पाऊंगा, करना मुझको माफ मैं तुमको प्यार नहीं दे पाऊंगा। इसके बाद प्रयागराज से आये कवि अखिलेश द्विवेदी ने मंच संभाला, हम अपना दर्द बांटें या न बांटें पर हंसी बांटे। भुलाकर सारे गम अपने, सभी के संग खुशी बांटें। इनके बाद इंदौर की कवियत्री ने गीत प्रस्तुत करते हुए माहौल को बदलते हुए कुछ प्यार भरी पंक्तियां प्रस्तुत की-दिल रहेगा तुम्हारा तुम्हारी कसम, अब न होगा हमारा तुम्हारी कसम। मैंने हक में तुम्हारे दुआ मांग ली, टूटा जब भी सितारा तुम्हारी कसम। इसके बाद दिल्ली से आए कवि अनिल अग्रवंशी ने बेटियों की महत्ता बताते हुए कहा कि इसे बेटा बना पालो तो ये इतिहास छू लेगी, करो विश्वास बेटी पर तो ये विश्वास छू लेगी। कभी जीवन में बेटी को नजरअंदाज मत करना,जरा से पंख खोलोगे तो ये आकाश छू लेंगी। इनके बाद धार के कवि ने आतंकवाद पर प्रहार करते हुए कहा कि मुझे इस बात का गम है कि मेरा नाम बम है, मैं हर बार यूं ही छला गया हूं। बिस्मिल के हाथ से निकला और हिजबुल के हाथ चला गया हूं।अलवर से आए वीर रस के कवि विनीत चौहान ने कविताओं के माध्यम से सर्दी में भी गर्मी का अहसास करा दिया-लो हमने दुम सीधी कर दी उन आतंकी आकाओं की, जो उछल रहे थे आड़ लिए अलगावी नेताओं की। उनकी अकल ठिकाने ला दी उनके ताने बानो ने, सबकी ऐसी तैसी कर दी अपने वीर जवानों ने। अंत मे मंच संचालन कर रहे तेज नारायण तज ने कहा-सड़क रास्ते जाम कराकर जलवा अपने नाम कराकर, सभी मसीहा लौट चुके हैं शहर में कत्ले आम कराकर।

Posted By: vikash.pandey

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