Gwalior Injection ka Dose Column news: अजय उपाध्याय, ग्वालियर नईदुनिया। एक अनार और सौ बीमार वाली कहावत तो आपने सुनी ही होगी। ऐसा ही कुछ इन दिनों जिला के अस्पताल में हो रहा है। असल में हुआ यूं कि कोविड ड्यूटी की थकान मिटाने के लिए कूल पार्टी का आयोजन एक होटल में किया गया। जहां पर सैंपलिंग टीम में लगे दंत विशेषज्ञ व उनके आका भी शामिल हुए थे। जब पार्टी अपने शबाब पर थी तभी पता चला कि बाथरूम के पास आगरा की मिठाई के चक्कर में अफसर आपस में भिड़ गए। शोर-शराबा हुआ तो देखा कि दोनों अफसर आपस में झगड़ रहे थे और एक-दूसरे को अपशब्द कह रहे थे। लोगों को समझने में देर न लगी कि किसी की थाली को कोई और चुग गया। मामला ठंडा हुआ तो सभी ने कसमें खाईं कि यहां की बात यहीं रहे। अब इनमें एक अफसर अभी अस्पताल ही नहीं आ रहे, दूसरे निगाहें बचा रहे हैं।

डिटेक्टिव बनने चले थे, नौकरी खो बैठेः कोरोना महामारी दुखों का पहाड़ लेकर आई। किसी का स्वजन गया तो किसी का काम धंधा गया। पर यही कोरोना बहुत से लोगों के लिए अवसर भी लेकर आया। ऐसा नहीं कि यह अवसर केवल निजी अस्पतालों को मिला, यह सरकारी अस्पताल के स्टोर तक भी पहुंचा। असल में जेएएच में 15 कोविड सेंटर बने, जिसमें सैकड़ों मरीज भर्ती हुए। इन सेंटर में छोटे-छोटे स्टोर बनाए और उसके इंचार्ज भी। सेंट्रल स्टोर से जब इन स्टोरों में दवाएं पहुंचती तो इंचार्ज उनकी आमद देता। एक रोज सेंट्रल स्टोर से दवाएं पहुंचाई गई तो उसमें महंगे वाले 500 इंजेक्शन कम थे। इंचार्ज ने फट से गलती पकड़ ली और उन इंजेक्शन की आमद देने से इन्कार कर दिया। लोगों ने इंचार्ज को समझाया भी कि झमेले में मत पड़, हस्ताक्षर कर दे। पर वे चल दिया डिटेक्टिव बनने तो नौकरी भी चली गई।

जूडा की हड़ताल में नेताजीः जूडा की हड़ताल में नेताजी के साथ-साथ डाक्टरों ने भी सोचा चलो सरकार पर दबाव बनाने का बहाना सही है। किसी को प्रमोशन की चुभन थी तो किसी को वेतन बढ़ने का लालच। पर बीच में आ गया कोर्ट तो जूडा ने पकड़ी 17 फीसद स्टायपेंड की ओट और हड़ताल ले ली वापस। नेताजी के दिल के अरमान दिल में रह गए। सोचा था कि इस बहाने शासन के साथ स्थानीय प्रबंधन को भी अपना हुनर दिखा देंगे। पर ऐसा नहीं हुआ तो जूडा के दो फाड़ करने की पटकथा गढ़ दी। हालांकि हुआ तो कुछ नहीं पर इस हड़ताल में सीनियर रेजिडेंट तीन दिन का अवकाश मनाकर वरिष्ठ डाक्टरों को अस्पताल के हालात दिखा गए। वरिष्ठ डाक्टर जब ड्यूटी रूम में पहुंचे तो खुद को न रोक सके। बोल बैठे कि ऐसे कमरे में तो हमारे नौकर भी नहीं रहते जहां उन्हें बैठा रहे हैं।

पासा पड़ गया उल्टाः जयारोग्य अस्पताल में कुछ दिन पहले एंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन के नाम पर ठगी करने वाला पकड़ा गया था। तो लोगों की बांछें खिल गई, सोचा कि चलो इसी बहाने बुराई वालों को निपटा लें। पर कभी-कभी पासा उल्टा भी पड़ जाता है। प्रबंधन ने पुलिस के सामने ठग के साथ जिस स्टाफ का नाम जपा, तो उस स्टाफ ने भी फिरकी खाई और उल्टा नाम जपना शुरू कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई। अब समझ नहीं आ रहा कि कहां छिपें। हालांकि पहलवान जी अभी पहलवानी दिखाते हुए अल्टीमेटम दे रहे हैं, पर संभल कर चलना हवाओं के रुख बदले हुए हैं। असल में प्रबंधन ने खेल खेला था ठग के रिश्तेदार को बचाने का। रिश्तेदार इन दिनों स्टोर को संभाल रही हैं तो अब आप खेल का मकसद समझ गए होंगे, पर इस खेल में रेल निकली अकेले कुंअर साहब की, दोंनो ठाकुर मजे ले रहे।

Posted By: vikash.pandey

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags