Gwalior JAH News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। मप्र के चिकित्सा शिक्षा विभाग में विभाग के मंत्री के ही आदेश व चेतावनी की सुनवाई नहीं है। एक साल पहले खुद जब विभाग के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जेएएच में आकर यह कह गए थे कि यहां मेडिकल पर दवाएं क्यों बेची जारही हैं, यह तो शासन से निशुल्क मिलती हैं। इसपर जेएएच में संचालित हो रहे मेडिकल स्टोर को बंद कर दिया गया। मंत्रीजी तो चले गए लेकिन यहां के जिम्मेदार नहीं मान रहे, अब हजार बिस्तर के अस्पताल में जेनेरिक दवाओं के लिए मेडिकल खोलने की तैयारी की जा रही है जबकि 395 तरह की दवाएं शासन की ओर से निशुल्क मिलतीं है। तो अब मरीजों को दवा खरीदने की आवश्यकता क्यों होगी। इस पूरे मामले में दाल में काला है, हकीकत में जेएएच व जीआरएमसी के जिम्मेदार ही गुपचुप तारीके से शासन के निर्देश का हवाला देकर स्टोर खुलवाने की जुगत में हैं।

10 लाख रुपये का मिलता था राजस्व

जेएएच में मेडिकल स्टोर से गजराराजा मेडिकल कालेज को प्रतिमाह 10 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता था। लेकिन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्ववास सारंग ने यह कहते हुए कि जब सभी दवाएं शासन निशुल्क दी जा रही हैं तो अस्पताल में मेडिकल स्टोर क्यों संचालित किया जा रहा है। इसे तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। इसके बाद मेडिकल कालेज प्रबंधन ने दवा स्टोर बंद करा दिया। जब शासन से 395 प्रकार की दवाएं शासन से मिल रही हैं तो फिर जेनेरिक दवाएं मरीज क्यों खरीदेगा। इससे साफ है कि शासन से मिलने वाली दवाएं उपलब्ध न कराते हुए अस्पताल में मरीजों को दवा खरीदने पर मजबूर किया जाएगा। जिससे गरीब मरीजों का पैसा खर्च होगा।

दवा स्टोर खोलने की प्रक्रिया

अधीक्षक द्वारा डीन के माध्यम से प्रस्ताव को स्वशासी समिति की कार्यकारणी में रखा जाएगा। इसके बाद कार्यकारणी अनुमोदन करती है। उसके बाद खुली निविदा के माध्यम से आवेदन बुलाकर नियमानुसार आवंटन होता है।

जेएएच अधीक्षक के कार्डिनेशन में हो रहा काम:डीन

गजराराजा मेडिकल कालेज के डीन डा अक्षय निगम का कहना है कि शासन के निर्देश पर हजार बिस्तर अस्पताल में प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र खोला जा रहा है। जन औषधि केन्द्र संचालित करने की अनुमति किसे मिली है इस विषय में जानकारी नहीं है। लेकिन शासन के निर्देश है इसलिए बिना टेंडर के जगह उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश के मेडिकल कालेज के अस्पतालों में जन औषधि केन्द्र खोले जाएंगे ऐसाकोई शासन कीओर से आदेश जारी हुआ है इस पर डा निगम का कहना है कि मेडिकल अस्पताल में खोला जा रहा है इसलिए उसकी पूरी प्रक्रिया का पालन जेएएच अधीक्षक के द्वारा की जा रहा है। शासन से जो भी निर्देश व पत्र मिले है वह अधीक्षक के पास होंगे, इसलिए आगे की जानकारी वही दे सकेंगे।

अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र या फिर अमृत फार्मेसी को ही खोला जा सकता है। इसके लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है जिसमें जेनेरिक दवा स्टोर खोलने की आवश्यकता जताई जाएगी।

डा आरकेएस धाकड़ , अधीक्षक जयारोग्य अस्पताल

संभागायुक्त दीपक सिंह से सीधी बात-

प्रश्न: हजार बिस्तर अस्पताल में जेनेरिक मेडिसिन का दवा स्टोर खोला जाएगा क्या।

जवाब: हां ऐसा चल रहा है, अधिक जानकारी नहीं है लेकिन बताया है कि वहां की आवश्यकता है।

प्रश्न: क्या शासन से कोई आदेश मिला है,जिसके आधार पर प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र खोलने की तैयारी है।

जवाब: शासन से किसी निर्देश या आदेश की जानकारी नहीं है मुझे, मुझे तो डीन के द्वारा प्रस्ताव भेजा गया है।

प्रश्न: दस लाख रुपये का राजस्व प्रदान करने वाला मेडिकल स्टोर चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने यह कहते बंद कराया कि शासन निशुल्क दवा दे रहा तो यह क्यों चल रहा,फिर जन औषधि केन्द्र की आवश्यकता क्यों।

जवाब: मुझे अधिक जानकारी तो नहीं है मैं इस वक्त एक मीटिंग में हूं, बाद में इस विषय पर बात करें और फोन कट कर दिया।

Posted By: anil tomar

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