Gwalior JU Budget News 2021: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जीवाजी विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की बैठक में बुधवार को वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश किया गया। बजट में करीब 136 करोड़ का अनुमानित व्यय और आय 125 करोड़ की बताई गई। करीब 11 करोड़ का अनुमानित घाटा बताया गया। बजट को देखने के बाद कार्यपरिषद सदस्यों ने हंगामा करते हुए कहा कि लाकडाउन के दौरान बंद संस्थानों पर लाखों रुपये कैसे खर्च हो गए। वित्त समिति से पूरा बजट क्यों पास नहीं कराया गया। इन आरोपों का कुलपति व अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके। सदस्यों ने कहा कि जितना हिस्सा वित्त समिति ने पास किया है, उतना ही पास किया जाए। इसके बाद दो सदस्यों ने अपनी आपत्ति करते हुए बजट पर असहमति पत्र पेश कर दिया। हंगामे के बीच बजट पास हो गया।

कार्यपरिषद सदस्य अनूप अग्रवाल व मनेंद्र सोलंकी ने लाकडाउन के दौरान किए गए खर्चों पर आपित्त की और पूरे बजट पर अपना असहमति पत्र पेश कर दिया। बजट पर कुलपति संगीता शुक्ला की प्रतिक्रिया लेने के लिए फोन भी किए और संदेश भी भेजा, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।

मेंबरों ने यह पेश की आपत्ति

- 2019-20 में बैंक व पोस्ट आफिस से तीन लाख 16 हजार का किराया प्राप्त हुआ। किराया बढ़ने की बजाए दो लाख 71 हजार पर कैसे आ गया। यह कैसे घटा, इसकी जांच होनी चाहिए।

- नए वित्त वर्ष में लाकडाउन लगा हुआ था। सभी तरह की शैक्षणिक गतिविधियां बंद थीं। इस दौरान गोपनीय, परीक्षा, वाहन भत्तों पर पांच करोड़ 90 लाख 96 हजार 144 रुपये खर्च किया गया है। यह पैसा जब खर्च किया गया है, तब लाकडाउन की वजह से सभी गतिविधियां बंद थीं। इस खर्च का सूक्ष्म आडिट होना चाहिए।

- डाक व तार पर छह लाख 79 हजार रुपये खर्च करना बताया गया है। इसमें फर्जीवाड़ा परलिक्षित हो रहा है।

- यात्रा भत्तों पर 6.62 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन लाकडाउन में सब कुछ बंद था, भत्ते कैसे पास हुए हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए।

- पुस्तक व शोध पत्रिकाओं पर 1.39 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। जब लाइब्रेरी ही बंद थी तो इन पत्रों की जरूरत क्यों पड़ी।

- कार्यपरिषद सदस्य अनूप अग्रवाल व मनेंद्र सोलंकी ने आपत्ति करते हुए एक अप्रैल 2020 से दिसंबर 2020 तक किए गए खर्चों पर आपित्त करते हुए अनियमितता का आरोप लगाया।

- मल्टी आर्ट काम्प्लेक्स के रखरखाव व साज सज्जा पर 53 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। आपत्ति करते हुए कहा कि अभी तो काम्प्लेक्स गारंटी पीरिएड में है। ठेकेदार की जगह विवि क्यों पैसे खर्च कर रही है।

बजट को क्यों अधिकार बताया

- वित्त समिति से पास होकर बजट कार्य परिषद में आता है। बजट के पांच बिंद पास किए जाते हैं, लेकिन वित्त समिति ने आयोजनेत्तर आय व व्यय के बिंदु को ही पास किया है। योजना आय व व्यय, विशेष प्रयोजनार्थ आय व व्यय, ऋण शीर्ष आय व व्यय, स्ववित्तीय योजना आय व व्यय के बिंदुओं को वित्त समिति के सामने रखा नहीं गया। मेबरों का आरोप था कि जब ये बिंद वित्त समिति से पास नहीं है तो इन बिदुओं को क्यों जोड़ा गया। यह अधूरा बजट है।

बजट पर एक नजर

- वित्तीय वर्ष 2021-22 में नान प्लान मेजर हेड में कुल आय 125 करोड़ रुपये व कुल व्यय 136 करोड़ रुपये का अनुमान है।

- स्थापना हेतु सातवें वेतनमान के अनुसार वेतन व एरियर आदि का प्रविधान किया गया है।

- विवि के परीक्षा भवन में आनलाइन परीक्षा प्रक्रिया उपलब्ध कराने के लिए बजट में प्रविधान है।

- बजट में सेमिनार, शोध संबंधी कार्य के लिए 4.32 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है।

- केंद्रीय पुस्तकालय में ई जर्नल्स के लिए दो करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

- अध्ययनशालाओं में क्लास रूम की अधोसंरचना के लिए एक करोड़ रुपये की राशि का प्रविधान किया गया है।

- परीक्षा भवन की अधोसंरचना के लिए पांच करोड़ रूपये का प्रविधान है।

- नवीन सेंटर फॉर मेडिकल साइंसेज, आयुर्वेद एंड एग्रीकल्चर के भवन व अधोसंरचना के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है।

बैठक में ये रहे मौजूदः विश्वविद्यालय के टंडन हाल में कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की अध्यक्षता में कार्यपरिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कुलाधिसचिव प्रो. उमेश होलानी, कुलसचिव प्रो. आनंद मिश्रा, प्रो. एसके शुक्ला, प्रो. पीके तिवारी, प्रो. मुकुल तैलंग, प्रो. रमा त्यागी, डॉ. मुनेंद्र सोलंकी, अनूप अग्रवाल, वीरेंद्र गुर्जर, डा. संगीता चौहान, डा. शिवेंद्र सिंह राठौड, जेयू की वित्त नियंत्रक सगीरा सिद्दीकी, वित्त विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर योगेंद्र सक्सेना मौजूद रहे।

वर्जन

- मेरी जानकारी के अनुसार बजट पास हो गया है। कोविड-19 के दौरान कार्यालय खुले रहे हैं। इस वजह से व्यय हुआ है। व्यय पर क्या आपत्ति है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।

केशव सिंह, पीआरओ जेयू

वर्जन-

लाकडाउन के दौरान लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि इस दौरान शिक्षण कार्य पूरी तरह से बंद थे। ऐसी मदों में खर्च दिखाया गया है, जिससे साफ दिख रहा है कि कहीं न कहीं फर्जीवाड़ा हुआ है। इसलिए लिखित में असहमति पत्र दिया है। अधूरा बजट पेश किया गया है।

मनेंद्र सोलंकी, कार्यपरिषद सदस्य

Posted By: vikash.pandey

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