अजय उपाध्याय, ग्वालियर नईदुनिया। फसल चक्र न होने से खेत की उर्वरक क्षमता तेजी से घट रही है। जिसके कारण खेत की मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी आ रही है। जिसका असर रवि व खरीफ की फसलों पर पड़ रहा है। करीब 16 हजार मृदा नमूनों का परिक्षण करने पर सामने आया कि मिट्टी में सल्फर,जिंक, आयरन,मैग्नीज, कॉपर ,बोरोन की कमी हो रही है। इसका असर फसल की पैदावार से लेकर उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि खेत में पैदा होने वाले अनाज में जब पोषक तत्व की कमी होगी तो उसका असर मानव शरीर पर पड़ता है। क्याेंकि कम पोषक तत्व वाले अनाज का सेवन करने पर शरीर में भी पोषक तत्व कम पहुंचने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आ रही है, बीमारियां बढ़ रही हैं। आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन की भी शरीर में कमी हो रही है। इसका असर सबसे अधिक महिला व बच्चों पर देखने को मिलता है। इससे छोटे बच्चों में आयरन की कमी से दांत न निकलना या अन्य तरह की बीमारियां जन्म लेतीं हैं।

किस क्षेत्र में कौन से उर्वरक घट रहेः

स्थान सैंपल जिंक आयरन मैग्नीज कॉपर सल्फर बोरोन

डबरा 4278 1861 2122 1973 124 448 261

मुरार 1700 847 717 453 16 99 140

घाटीगांव 3208 1633 1466 1374 19 247 432

भितरवार 7598 2738 3392 3427 217 615 418

पोषक तत्व का मानक,मृदा में होना जरूरीः

जिंक 0.5 पीपीएम से अधिक

आयरन 0.2 पीपीएम से अधिक

मैग्नीज 5.0 पीपीएम से अधिक

कॉपर 5.0 पीपीएम से अधिक

सल्फर 10.00 पीपीएम से अधिक

बोरोन 0.45 पीपीएम से अधिक

मिट्टी में पोषक तत्व का दुष्प्रभाव ,बचावः मृदा सर्वेक्षण अधिकारी का कहना है कि यदि मृदा में पोषक तत्वों की कमी आती है तो उससे फसल पर बुरा प्रभाव पड़ता है। सबसे पहले उत्पादकता घटती है, दानों में बजन कम होता है, फसल का रंग हरा कम होता है या पीला पड़ने लगता है। सरसों की फसल के लिए सल्फर की मात्रा में मृदा में सही होना चाहिए। क्योंकि सल्फर सरसों के दाने का बजन बढ़ाती है, जिससे तेल अधिक निकलता है। इसकी पूर्ति के लिए फसल चक्र व देशी खाद का प्रयोग सर्वोत्तम उपाय है। जिंक, आयरन व अन्य सूक्ष्म तत्वों की पूर्ति की कमी को खाद की मात्रा 25 प्रतिशत बढ़ाकर पूरा किया जा सकता है।

एक्सपर्ट व्यू-

सरसों का तेल हृदय रोगियों के लिए लाभदायक है। क्योंकि यह तेल शरीर में पहुंचने पर जमता नहीं है, जिससे सर्दियों में हृदयघात की आशंका कम हो जाती है। तेल के माध्यम से शरीर में निर्धारित मात्रा में पहुंचने वाला सल्फर नसों को तंदुरस्त रखता है। जिससे व्यक्ति जवान दिखता और उसका बुढ़ापा भी देरी से आता है।

डॉ राम रावत , एसोसिएट प्रोफेसर जीआरएमसी

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प्राकृतिक सप्लीमेंट के स्र्प में मिलने वाला जिंक, मैग्नीज आदि पोषक तत्व शरीर में एंटी ऑक्सीडेंट का काम करते हैं। इनकी कमी से महिलाओं में बांझपन की शिकायत,गर्भ में बच्चे की ग्रोथ पर प्रभाव पड़ता है, समय से पहले डिलेवरी,आदि की परेशानी आ रहीं हैं। इन तत्वों की कमी के लिए दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है। लेकिन प्राकृतिक तौर पर जब शरीर में यह तत्व पहुंचते हैं, ताे वह अधिक लाभकारी होते हैं।

डॉ नेहा गुप्ता, महिला राेग विशेषज्ञ स्त्री एवं प्रसूति राेग विभाग कमलाराजा अस्पताल

वर्जन-

16 हजार से अधिक मृदा नमूनों में सामने आया कि नाइट्रोजन की कमी तेजी से आ रही है। जिंक,आयरन, सल्फर व अन्य पोषक तत्व भी घट रहे हैं। जिससे फसल की पैदावार से लेकर उसकी गुणवक्ता पर प्रभाव पड़ रहा है। इस कमी को पूरा करने के लिए खाद की मात्रा 25 प्रतिशत तक बढ़ानी चाहिए।

अनंत विहारी सड़ैया,सहायक मृदा परिक्षण अधिकारी ग्वालियर

Posted By: vikash.pandey

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