- कोरोना के खतरे ने युवाओं में बढ़ाया वसीयत का चलन

- 40 से 45 वर्षीय लोग पहुंच रहे वकीलों के पास

Gwalior legacy News: विजय सिंह राठौर. ग्वालियर। वह वक्त अब लद गया, जब व्यक्ति उम्र के अंतिम पड़ाव में ही अपनी जायदाद की वसीयत तैयार कराता था। कोरोना ने लोगों को इतना डरा दिया है कि अब 40 से 45 साल की उम्र में लोगों को परिवार की बड़ी जिम्मेदारियों चिंता सताने लगी है। इस उम्र में ही लोग अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित कर देना चाहते हैं। यही वजह है युवा कारोबारी एवं नौकरी पेशा कई लोग वसीयत बनवाने वकीलों के पास पहुंच रहे हैं।

कोरोना के कारण जीवन की अनिश्चितता का खौफ इस कदर बढ़ा है कि पिछले डेढ़ साल में वकील और लॉ फर्मों के पास वसीयत बनवाने वाले लोगों की भीड़ अचानक बढ़ गई है। ये अपनी चल-अचल संपत्ति के वितरण के लिए वसीयत लिखवा रहे हैं, ताकि उनके न रहने पर परिवार को बिना किसी विवाद से आसानी से संपत्ति मिल जाए। न सिर्फ वकीलों, बल्कि पंजीयन अधिकारियों का भी यह कहना है कि पहले 60-65 साल आयु वर्ग के ऐसे लोग ही वसीयत तैयार कराते थे, जो किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हों। अब पूरी तरह से स्वस्थ व नौजवान लोगों में भी वसीयत तैयार करने को लेकर अत्याधिक रुझान बढ़ा है। ग्वालियर जिले में ही जनवरी 2021 से आज तक 575 वसीयत पंजीकृत हुई है। पंजीयक अधिकारियों ने बताया कि कोरोना से पहले सालाना 400 पंजीकृत वसीयत हुआ करती थीं।

केस-1: कोरोना ने पत्नी को छीना, पति वसीयत बनवाने के बाद ही गया दफ्तर

ग्वालियर के सिटी सेंटर निवासी 41 वर्षीय संजय श्रीवास्तव (परिवर्तित नाम) दिल्ली में चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। बीते दिनों उनकी पत्नी का कोरोना के कारण निधन हो गया। इस घटना से न केवल बुरी तरह टूट गए, बल्कि वे खुद की जिंदगी को लेकर भी आशंकित रहने लगे। संजय के 2 बेटे व 1 बेटी है, जिनकी भविष्य की चिंता भी उन्हें सताने लगी। ऐसे में संजय ने अपनी वसीयत तैयार कराई, जिसमें मृत्यु उपरांत संपत्ति बंटवारे की पूरी प्रक्रिया दर्ज करा दी। संजय ने इस वसीयत को अपने किसी भरोसेमंद को सुपुर्द किया, उसके बाद ही वे अपनी नौकरी पर वापस पहुंचे।

केस-2: रिश्तेदारी में संपत्ति को लेकर विवाद देखा तो कराई अपनी संपत्ति की वसीयत

गोल पहाड़िया निवासी 44 वर्षीय बंटी कुशवाहा (परिवर्तित नाम) ने हाल ही में अपनी चल-अचल संपत्ति की वसीयत कराई है। उनका कहना है एक रिश्तेदार की कोरोना से मृत्यु हो गई। परिवार पर वज्रपात के बावजूद उनके तीन बेटों में महज डेढ़ महीने बाद ही संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया। यह दुखद स्थिति देख मैंने बच्चों में प्रेम बनाए रखने अपनी संपत्ति की वसीयत करा दी।

अभिभाषक ने कहा

पिछले एक साल से वसीयत बनवाने के लिए अधिक लोग हमारे पास आने लगे हैं। चूंकि कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में युवाओं की भी मृत्यु हुई है, इसलिए बीते दो महीने से 40 से 45 आयु वर्ग के लोग भी वसीयत आने लगे हैं। कई ऐसे भी हैं जिनके पति या पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। पहले 60-65 वर्ष से अधिक आयु लोग ही वसीयत कराते थे, जो गंभीर रूप से बीमार हों।

-नरेंद्र कंसाना, एडवोकेट, जिला न्यायालय ग्वालियर

वर्जन

चूंकि वसीयत का पंजीयन कराना अनिवार्य नहीं है, इसलिए ज्यादातर लोग सादा कागज पर भी वसीयत बनवाकर अपने घर में रख लेते हैं या अपने किसी विश्वसनीय को दे देते हैं। हालांकि सादा कागज की अपेक्षा पंजीकृत वसीयत को कोर्ट अधिक मान्यता देता है। वसीयत पंजीयन में स्टांप नहीं लगता, कितनी भी संपत्ति हो केवल एक हजार रुपये शुल्क लगता है। हर दस्तावेज की तरह वसीयत को पंजीकृत कराने के लिए भी स्लॉट लेना होता है। हमारे यहां रोजाना कुल 300 स्लॉट दिए जाते हैं। वसीयत घर में बनी हो या पंजीकृत हो, उसमें दो स्वतंत्र गवाहों का होना अनिवार्य है। कोरोना के कारण युवाओं में वसीयत का चलन बढ़ा है।

-यूएस वाजपेई, उप महानिरीक्षक पंजीयन, प्रक्षेत्र ग्वालियर

Posted By: anil.tomar

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