Gwalior liquor scandal news: अजय उपाध्याय, ग्वालियर नईदुनिया। मुरैना में शराब में ऐसा कौन से जहरीला केमिकल था, जिससे एक के बाद एक लाशों की लाइन लग गई, इसका राज शव की आंख से निकले पानी से खुलेगा। डाक्टर ने शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में बताया कि मृतक के पेट में स्प्रिट की बदबू आई है। यह बदबू मिथाइल एल्कोहल के कारण से आती है। अब मिथाइल एल्कोहल की कितनी मात्रा शराब में थी इसका पता मृतक के आंख के पानी की जांच कराने पर पता चलेगा। इसलिए मृतक के आंख का पानी, ब्लड सैंपल व विसरा जांच के लिए रख लिया है।

मुरैना में जहरीली शराब पीने से 20 से ज्यादा लोग मौत की नींद सो चुके हैं। कई लोग जिंदगी-मौत के बीच झूल रहे हैं। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल शवों का पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर ने बताया कि इथाइल एल्कोहल शराब बनाने में उपयोग की जाती है लेकिन मिथाइल एल्कोहल से भी शराब बनाई जा रही है, जिसकी निश्चित मात्रा से अधिक डाली जाए तो वह जहर बन जाती है। मृतक की आंख का पानी, ब्लड सैंपल व विसरा जांच के लिए रख लिया है। डाक्टर का कहना है कि शराब पीने के बाद वह ब्लड में घुल जाती है, इसलिए ब्लड का सैंपल लिया गया है। इसकी जांच में पता चलेगा कि क्या संक्रमण फैला, जबकि विसरा की जांच मौत के अन्य कारण भी बताता है। एक्सपर्ट का कहना है कि असल में शराब जब शरीर में पहुंचती है तो वह खून में शामिल हो जाती है खून की जांच में इस बात का पता चलेगा कि इथाइल एल्कोहल है या फिर कोई अन्य। यदि अन्य कोई एल्कोहल (मिथाइल या अन्य कोई स्प्रिट) मिलता है तो यह पुष्टि हो जाएगी कि शराब जहरीली थी। जहरीला पदार्थ खाने या पीने पर व्यक्ति की आंख के अंदर मौजूद द्रव्य में परिवर्तन होता है और व्यक्ति अंधा हो जाता है। यदि यह परिवर्तन हुआ होगा तो यह समझा जाता है कि व्यक्ति ने जहरीला पदार्थ का सेवन किया है।

Posted By: vikash.pandey

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