Gwalior Lockdown News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना कर्फ्यू और धारा 144 के आदेश कागजों में भले ही हो गए हों, लेकिन सड़कों पर इसका कोई असर नहीं है। बाजारों में भीड़ है लोग छिपते-छिपाते सामान ले रहे हैं और दुकानें भी आधी खुली रहती हैं। कुछ दुकानों के आगे दुकानदार शटर आधा बंद कर खड़े हो जाते हैं और दाएं-बाएं से सामान देते हैं। जिला प्रशासन ने जो सुबह के समय छूट दे रखी है वह तो दिखावा बन गई है। हर बाजार गली में दुकानों से सामान और जमकर आवाजाही अब आदत सी बन गई है। पुलिस के बैरिकेड जरूर अलग-अलग जगह लगाए गए हैं, लेकिन खड़े होकर आने जाने वालों को देखने के अलावा पुलिस कुछ नहीं कर रही है। वहीं इंसीडेंट कमांडर भी गायब हैं। पिछले कई दिनों से प्रशासन का कार्रवाई का आंकड़ा सामने ही नहीं आ रहा है।

ज्ञात रहे कि कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने एक मई से सात मई तक कोरोना कर्फ्यू का आदेश जारी किया है। इसमें धारा 144 के तहत बंदिशें लगाई हैं और कुछ राहत भी दी गई हैं। इतने सब के बाद भी शहर में सुबह से शाम यह हालात हैं कि कोरोना कर्फ्यू नजर नहीं आता है। जिला प्रशासन ने कागजों पर तो बंदिशें लगा दीं, लेकिन मैदानी स्तर पर हालात ठीक नहीं हैं।

इतने हालात बिगड़े, तब भी ढिलाई, ये खतरनाक हैः कोरोना संक्रमण के भीषण हालात को रोकने के लिए ही जिला प्रशासन और पुलिस ने सख्ती की रणनीति बनाई और क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में भी सख्ती के दावे किए गए। माननीय हों या प्रशासन सख्ती मैदान में कितनी है कोई झांककर देखने वाला नहीं है। खुलेआम सुबह से मंडी से लेकर शहर की सड़कों तक आवाजाही शुरू हो जाती है। पुलिस और प्रशासन चंद एफआइआर और चालान करके अपना पल्ला झाड़ लेता है।

नहीं राेकती पुलिसः पुलिस ने जगह-जगह अपने बैरिकेड पर बैनर लगा दिए हैं कि आवश्यक तौर पर जाने वाले अपनी इमरजेंसी से जुड़ा कारण बताएं या दस्तावेज दिखाएं। हकीकत में बैरिकेड के बगल से दो पहिया व चार पहिया वाहन निकल जाते हैं और पुलिस फोर्स टोकता तक नहीं है। यह पिछले कई दिनों से चल रहा है। ऐसी बेपरवाही से संक्रमण का खतरा नहीं बढ़ रहा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

चालान हल नहीं, सख्ती करके बढ़ाएं उपस्थितिः पुलिस और प्रशासन का काम चालान करके आंकड़े दिखाना नहीं है, बल्कि ऐसी महामारी के दौर में सड़कों व बाजारों में लेागों को रोकने के लिए अपनी उपस्थिति दिखाना जरूरी है। न पुलिस के सायरन बजाते वाहन दिखते न इंसीडेंट कमांडर अपने वाहनों से माइक के माध्यम से लोगों को रोकते हैं। कलेक्टर और एसपी ने कितनी भी व्यवस्था बना दी हो लेकिन पालन कुछ नहीं हो रहा है।

Posted By: vikash.pandey

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