Gwalior Mela 2023: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अपनी भव्यता के लिए पहचाना जाने वाला ग्वालियर व्यापार मेला इस बार गंदगी के संकट से जूझ रहा है। साफ-सफाई और स्वच्छता के मामले में मेला प्रबंधन की लाचारी सैलानियों के लिए सरदर्द बनी हुई है। मेले में छत्री के पास बने शौचालय इतने गंदे हैं कि उन्हें देख कर सैलानियों की हिम्मत जवाब दे जाती है। इससे मेले की छवि भी खराब कर रहा है। शाम के समय मेले के शौचालय को देखकर ऐसा महसूस ही नहीं होता कि इनकी सफाई होती भी है। बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती है, मेले में प्रशासन और मेला प्रबंधन द्वारा कोई भी कूड़ादान नहीं रखवाया गया है। इससे मेले में घूम रहे लोग खाने पीने की चीजों का कचरा यहां वहां फेंक देते हैं। बता दें कि मेला प्राधिकरण ने सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम को पत्र भेजा तो वहां से 1.16 करोड़ रुपये का प्रस्ताव आया। इतनी अधिक राशि को देख प्राधिकरण ने सफाई का ठेका लगभग आठ लाख रुपये में एक निजी कंपनी गालव इंटर प्राइजेज को दे दिया। इस कंपनी के संचालक अशोक मौरे, नगर निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। शौचालय जाने में बड़ी दुविधा : मेले में शौचालय जाना अपने आप में बड़ी दुविधा है। शौचालयों में यूरिनल और वाश बेसिन में हर ओर गुटका थूकने से निशान बने हुए हैं। कुछ जगह तो इतनी गंदी हैं कि शौचालय के बाहर तक बदबू आ रही है। कहीं आने जाने वाले रास्ते पर पानी भरा है तो किसी-किसी शौचालय में तो बिजली भी नहीं है। कुछ शौचालयों के दरवाजे ही बंद पड़े हैं। ऐसे में सबसे अधिक समस्या महिला सैलानियों को होती है।

रास्ते में बिखरी पानी की बोतलें

द्यमेले में घूम रहे सैलानी जब ऐसी खाने पीने की चीजें लेते हैं जिन्हें चलते-चलते खाया पिया जा सके तो उसके कचरे को यू हीं रास्ते पर फेंक देते हैं। अब मेला प्रबंधन ने तो किसी छत्री पर कूड़ेदान की व्यवस्था की नहीं है और प्रत्येक दुकानदार के पास कूड़ादान है नहीं। खासकर झूला और खानपान सेक्टर में आपको पानी की बोतल और पाउच, दोने, चिप्स के पैकेट आसानी से इधर-उधर फैले मिल जाएंगे। वहीं लगभग सभी छत्री के पास रात के समय कूड़े के ढेर भी लगे मिल जाते हैं।

मंत्रीजी का अजीब तर्क

मेले में लगभग 2000 दुकानें हैं और इसकी सफाई व्यवस्था में महज 35 कर्मचारी लगाए गए हैं। कर्मचारियों की अलग-अलग टोली सुबह और शाम के समय सफाई के लिए जाती है, लेकिन सैलानियों की संख्या अधिक होने की वजह से गंदगी हो कम नहीं हो पाती है। तुलनात्मक तौर पर देखा जाए तो दुकानों के अनुपात में कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है।

इस समस्या को देखने की जिम्मेदारी मेरी नहीं हैं, इतने सारे कार्यक्रम चल रहे हैं अब इस तरह की छोटी-छोटी चीजों को मैं देखने लगा तो कैसे काम चलेगा। -आेम प्रकाश सकलेचा, उद्योग मंत्री एवं मेला अध्यक्ष मेले में लगातार साफ-सफाई चलती रहती है, लेकिन अगर इस तरह की समस्या है तो हम प्रमुखता इसका निराकरण करवाएंगे। कोशिश रहेगी सैलानियाें को कोई परेशानी न आए ।

निरंजनलाल श्रीवास्तव, सचिव, मेला प्राधिकरण

Posted By: anil tomar

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