Gwalior Municipal chairman News: ग्वालियर (नप्र)। नगर निगम के अधिकारियों ने संपत्तिकर नामांकन प्रकरणों के मामले में परिषद द्वारा पास किए गए ठहराव को बदलते हुए सिर्फ वेबसाइट पर विज्ञप्ति प्रकाशन का आदेश मंगलवार को जारी कर दिया। इसकी प्रतिलिपि भी सभापति को नहीं भेजी गई। निगम आयुक्त किशोर कान्याल ने एमआइसी के समक्ष प्रस्ताव रखा था कि समाचार पत्रों के बजाय नामांकन प्रकरणों की विज्ञप्ति निगम की वेबसाइट पर सात दिन के लिए प्रकाशित की जाए और इसके बदले में दो हजार के बदले सिर्फ 500 रुपये का शुल्क लिया जाए। एमआइसी ने इसे पास भी कर दिया था, लेकिन परिषद की बैठक में सभापति मनोज तोमर ने निगम की वेबसाइट और समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशन शुल्क को 500 रुपये करने का आदेश जारी किया था।

धारा 167 के आशयों की पूर्ति के लिए नामांकन प्रकरणों की विज्ञप्ति 15 दिनों के लिए समाचार पत्रों में प्रकाशित करने का पूर्व में प्रविधान था। उच्च न्यायालय ने एक याचिका की सुनवाई के बाद दिए गए निर्देशों के बाद 15 दिवसीय व्यक्तिगत विज्ञप्ति प्रकाशन का आदेश 15 मार्च 2021 को जारी किया था। गत 30 सितंबर को निगमायुक्त ने एमआइसी को प्रस्ताव भेजा था कि 15 दिवसीय विज्ञप्ति के चलते प्रकरणों के निराकरण में विलंब होता है। ऐसे में इसे निगम की वेबसाइट पर दो हजार में सात दिन के लिए प्रकाशित किया जाए। एमआइसी ने 27 अक्टूबर को हुई बैठक में दो हजार के शुल्क को 500 रुपए कर स्वीकृति दे दी थी। गत नौ जनवरी को परिषद की बैठक में इस पर चर्चा हुई। इस बिंदु पर सभापति ने आदेश जारी किया कि आवेदक द्वारा प्रकाशित विज्ञप्ति को निरंतरित रखते हुए निगम की वेबसाइट पर अपलोड करने और समाचार पत्र में विज्ञप्ति प्रकाशन का शुल्क 500 रुपये करने पर स्वीकृति दी जाती है। इसका सीधा मतलब है कि दोनों ही जगहों पर विज्ञप्ति का प्रकाशन हो सकता है। मंगलवार को निगमायुक्त ने इस संबंध में जो आदेश जारी किया, उसमें परिषद के ठहराव का तो हवाला दिया गया, लेकिन समाचार पत्र हटा निगम की वेबसाइट का उल्लेख किया।

ठहराव में वेबसाइट और समाचार पत्र दोनों का उल्लेख था। निगमायुक्त के आदेश की कापी मुझे नहीं मिली है। इस कारण उसमें क्या है, यह मुझे नहीं पता। यदि ठहराव के विपरीत आदेश जारी हुआ है, तो हम शासन को पत्र लिखेंगे। मनोज तोमर, सभापति मैं ठहराव चेक कराता हूं हमारा उद्देश्य वेबसाइट पर ही विज्ञप्ति प्रकाशित कराने का था, ताकि कम समय में प्रकरणों का निराकरण हो सके। यदि ठहराव में समाचार पत्रों का उल्लेख है, तो मैं इसे चेक करा लेता हूं। इसके बाद इस संबंध में आगामी कार्रवाई की जाएगी।

किशोर कान्याल, आयुक्त नगर निगम

Posted By: anil tomar

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