Gwalior Municipal Corporation Election 2022: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इस बार महापौर की सीट महिला या ओबीसी की हो सकती है। महापौर पद के आरक्षण की रोटेशन प्रक्रिया के तहत सीट तय की जाती है। वर्ष 2014 में जो आखिरी महापौर के लिए चुनाव हुए थे, उसमें सामान्य सीट थी। इसके बाद 2020 में हुई आरक्षण प्रक्रिया के तहत अनारक्षित महिला सीट हो गई, लेकिन चुनाव नहीं हुए। जातिगत आबादी के गणित के आधार पर सीट आरक्षण तय किया जाता है। इस बार होने वाले महापौर के चुनाव में सामान्य सीट नहीं रहेगी। इसी गणित के साथ संभावित दावेदारों ने अपने दांव-पेंच लगाना शुरू कर दिए हैं। वहीं निकाय चुनाव में कुल 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के आदेश के तहत ग्वालियर नगरीय निकाय में अभी 44 प्रतिशत आरक्षण है, जिसमें छह प्रतिशत के अंतर को नए नोटिफिकेशन में भरा जा सकता है।

यह बता दें कि महापौर की सीट का आरक्षण भोपाल स्तर से आयोग द्वारा कराया जाता है। इसमें सभी निकायों की जातिगत आबादी को देखते हुए सीट का निर्धारण होता है। इसमें सामान्य वर्ग, ओबीसी और एससी व एसटी वर्ग शामिल रहता है। रोटेशन प्रक्रिया के तहत सीटों का आरक्षण बदल जाता है। जिले में पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण प्रक्रिया के लिए कलेक्टर स्तर व एसडीएम स्तर पर अधिसूचना आज जारी कर दी जाएगी। अंतिम प्रकाशन 25 मई को होगा, जिसमें पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

सभी तरह की छुट्टियों पर लगा प्रतिबंधः प्रस्तावित नगरीय निकायों एवं त्रि-स्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन को ध्यान में रखकर जिले में पदस्थ शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अवकाश पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही प्रसूति एवं अन्य चिकित्सकीय अवकाशों को छोड़कर सभी तरह के अवकाश पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रभारी कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) आशीष तिवारी ने यह आदेश जारी किया है। विशेष परिस्थितियों में किसी भी प्रकार के अवकाश को स्वीकृत करने से पूर्व विभागीय कार्यालय प्रमुखों को अपर कलेक्टर एचबी शर्मा से अनुमोदन लेना होगा।

ओबीसी आरक्षण: अभी तय सीटों की स्थितिः

-2009 में 60 वार्ड के आरक्षण में 15 सीट ओबीसी वर्ग की थीं।

-2014 में छह वार्ड और नए बढ़े तो 66 वार्ड के आरक्षण में 17 सीट ओबीसी वर्ग की।

-2020 में हुई आरक्षण प्रक्रिया में भी 66 वार्ड में 17 ओबीसी की सीटें थीं।

हैदराबाद से आए इंजीनियर, आज से एफएलसी शुरूः उप जिला निर्वाचन अधिकारी स्थानीय निर्वाचन विनोद भार्गव ने बताया कि निकाय चुनाव के लिए ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग के लिए हैदराबाद से इंजीनियरों की टीम आ गई है। टीम ने शुक्रवार से एफएलसी का कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए कलेक्ट्रेट में ही व्यवस्था की गई है।

निकाय चुनाव: अभी यह आरक्षण स्थितिः

अनुसूचित जाति 17.34 प्रतिशत

अनुसूचित जनजाति 1.41 प्रतिशत

ओबीसी वर्ग 25 प्रतिशत

कुल आरक्षण 44 प्रतिशत

जानें जनता काे कब मिला महापाैर चुनने का अधिकारः महापौर के चुनाव में 1994 से पार्षद महापौर को चुनते थे। वर्ष 2000 तक यह व्यवस्था रही और वर्ष 2000 से जनता को महापौर चुनने का मौका मिलने लगा। इस बार भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर महापौर के चुनाव होंगे, अभी यह स्थिति साफ नहीं है।

महापौर: पहले कब कौन रहाः

-1994 अनुसूचित जाति महिला अरुणा सैन्या

-2000 अनुसूचित जाति पुरूष पूरन सिंह पलैया

-2005 सामान्य पुरूष विवेक नारायण शेजवलकर

-2009 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला समीक्षा गुप्ता

-2014 सामान्य विवेक नारायण शेजवलकर

-2020 अनारक्षित महिला चुनाव नहीं हुए

वर्जन-

आयोग की ओर से लगातार दिशा निर्देश मिल रहे हैं। एफएलसी के लिए इंजीनियरों की टीम आ गई है। पंचायत चुनाव को लेकर आज अधिसूचना जारी की जाएगी। 25 को आरक्षण प्रक्रिया होगी। निकाय चुनाव की भी तैयारी चल रही है।

आशीष तिवारी, प्रभारी कलेक्टर, ग्वालियर

Posted By: vikash.pandey

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close