Gwalior Municipal Corporation News: दीपक सविता, ग्वालियर नईदुनिया। शहर की सड़कों की हालत बेहद खराब है, सड़कों के निर्माण कार्य के दौरान मटेरियल की गुणवत्ता जांचने के लिए नगर निगम हर कार्य का सैंपल कराता है। इन सैंपलों की जांच पहले नगर निगम की लैब में हुआ करती थी, लेकिन इस लैब में एक भी सैंपल फेल नहीं हुआ था। इसके कारण इस मामले की जांच पहले तात्कालीन निगमायुक्त अनय द्धिवेदी ने की थी। बाद में इस लैब पर लोकायुक्त ने प्रकरण दर्ज कर लिया था। इसके कारण यह लैब बंद हो गई थी। सैंपल फेल नहीं होने का कारण अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदार से मिलीभगत थी। अधिकारी कभी भी मौके पर जाकर सैंपल नहीं जांचते हैं। निगम की लैब बंद होने के कारण फिलहाल सैंपलों की जांच एमआइटीएस की लैब, पीडब्ल्यूडी विभाग की लैब, एवं एनएबीएल में कराई जा रही है। एनएबीएल लैब मतलब केंद्र सरकार से प्रमाणित लैब में ही अब सैंपलाें की जांच की जाती है। हालांकि आश्चर्य की बात यह है कि आज तक निगम का एक भी सैंपल जांच में फेल नहीं हुआ है। नगर निगम में हर साल करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक के सड़कों के निर्माण कार्य एवं रेस्टोरेशन का कार्य करता हैं। इनमें नगर निगम स्वयं के खर्च से करीब 50 करोड़ की सड़कों का निर्माण एवं रेस्टोरेशन कराता है। इसके बाद प्रत्येक पार्षद को 47.50 लाख रुपये की मौलिक निधि मिलती है, शहरी सीमा के 66 वार्डाें में इतने ही पार्षद भी हाेते हैं। इसके चलते करीब 31.35 करोड़ रुपये इनकी पार्षद निधि से आते हैं। जबकि महापौर को हर साल 5 करोड़ रुपये एवं सभापति को 3 करोड़ रुपये की मौलिक निधि के मिलती हैं। जिसका उपयाेग शहर विकास के लिए करना हाेता है। इस पैसे में से अधिक का उपयोग सड़कों के निर्माण कार्य में ही किया जाता है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री अधाेसंरचना का फंड भी आता है। इसके बाद विधायक निधि, सांसद निधि एवं बड़े निर्माण कार्याे के लिए शासन से विशेष पैकेज के तहत पैसा मांगा जाता है। बाद में यह पैसा जनता से टैक्स के रूप मेें वसूला जाता है। इतने निर्माण कार्य हाेने के बाद भी कभी काेई सैंपल का फेल नहीं हाेना जांच पर सवाल खड़े कर रहा है।

Posted By: vikash.pandey

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