- किस्से नगर सरकार के

ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। 4 अप्रैल 1961 से 3 अप्रैल 1962 तक महापौर के पद पर रहे स्व डा़. रघुनाथ राव पापरीकर उस समय शहर जिला कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी थे। 1961-62 में देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का ग्वालियर आगमन हुआ था। उस दौरान उन्हें महल में जाना था लेकिन उस समय सामंतवाद के खिलाफ कांग्रेस की नीति थी। इसके चलते जब डा. पापरीकर से प्रधानमंत्री ने बात की तो उन्होंने महल में जाने से मना कर दिया था। उस समय जिलाध्यक्ष ही जिले का सर्वाेच्य हुआ करता था। जिलाध्यक्ष के निर्णय को प्रधानमंत्री ने माना और महल जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया था। इस बात से राजमाता विजयाराजे सिंधिया डा. पापरीकर से नाराज हो गई थीं।

डा. रघुनाथराव पापरीकर महापौर के साथ शहर जिलाध्यक्ष भी थे। वहीं राजमाता विजयाराजे सिंधिया उस समय कांग्रेस में थीं। इसके कारण राजमाता का कांग्रेस में काफी सम्मान था, जबकि देश को आजाद हुए मात्र 14 साल ही हुए थे। आजादी के समय सभी राजपरिवारों से उनकी सम्पत्ति सरकार ने ले ली थी। साथ ही सामंतवाद के खिलाफ अभियान भी छिड़ा हुआ था। उस समय प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की एसएएफ मैदान पर सभा थी। उस समय पंडित जवाहर लाल नेहरू को ग्वालियर आगमन के बाद महल में जाना था। वहां पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया के साथ चाय का कार्यक्रम था। उस दौरान शहर जिलाध्यक्ष की सलाह के बिना कोई भी नेता , मंत्री, यहा तक की प्रधानमंत्री भी अपना कार्यक्रम तय नहीं करता था। शहर जिलाध्यक्ष रहते हुए महल जाने की डा. रघुनाथ राव पापरीकर ने मना कर दी। इसके कारण प्रधानमंत्री को अपना कार्यक्रम बदलना पड़ा। इसके बाद नाका चंद्रवदनी मार्ग से तात्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को एसएएफ तक लाया गया। उस दौरान आज की थीम रोड को प्राइवेट रोड के नाम से जाना जाता था और वहां पर हमेशा अंधेरा रहता था क्योंकि वहां से आवाजाही बहुत कम होती थी। लेकिन प्रधानमंत्री के आगमन के चलते एक ही रात में महापौर रहते हुए पूरी सड़क पर लाईट आदि लगवाई गई थी।

Posted By: anil tomar

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