-अंकसूची के वितरण की व्यवस्था बदहाल, कागजों में घूमती रहती है शिकायतें

ग्वालियर.(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जीवाजी विश्वविद्यालय की वह शाखा जहां से जहां से स्नातक और स्नातकोत्तर की अंकसूची का वितरण किया जाता है, नैक की तैयारियों के चलते पिछले कुछ दिनों से वहां रंगरोगन का काम चल रहा है। इस सब के चक्कर में विद्यार्थियों को चूना लगाया जा रहा है । इस काम का बहाना देकर अधिकारी अपनी सीट से उठकर इधर-उधर हो जाते हैं और विद्यार्थी मार्कशीट के लिए चक्कर काटते रहते हैं। इस मामले में छात्रों ने आरोप लगाते हुए बताया है कि विश्वविद्यालय मार्कशीट संबंधित समस्याओं का निराकरण करने में लगातार लापरवाही बरतता है । पहले तो गलत मार्कशीट छाप कर भेज देता है फिर जब सुधार करवाना चाहो तो पहले आफलाइन टोकन के माध्यम से शिकायत लगवाते है और फिर छात्रों को चक्कर कटवाने का सिलसिला शुरू हो जाता है । क्षेत्रीय विद्यार्थी तो इस समस्या को तब भी झेल लेते हैं लेकिन बाहरी राज्याें मे रहने वाले विद्यार्थियों को इस सब के चक्कर में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है । नईदुनिया ने जब मौके पर जा कर इस मामले की पड़ताल की तो हालात लगभग वैसे ही निकले जैसा विद्यार्थियों का आरोप था।

खाली सीट पर फाइलों के गठ्ठर

पड़ताल के दौरान अंकसूची वितरण शाखा में जोर-शोर से रंगरोगन चलता मिला । वहीं अंकसूची के लिए चक्कर काट रहे कुछ विद्यार्थी भी शाख के अंदर खाली सीटों पर अधिकारियों के आने का इंतजार करते मिले । जब मौके पर मौजूद कर्मचारियों से इस अनियमितता के पीछे का कारण जानना चाहा तो उन्होंने विभाग में कर्मचारियों की कमी होने की बात कही । कुल मिला कर इस पूरी धुना-बुनी में भुगतना सिर्फ विद्यार्थियों को पड़ रहा है ।

शिकायत भी करना मुश्किल

जब इन अनियमितताओं से त्रस्त होकर विद्यार्थी अंकसूची से संबंधित शिकायत करना चाहे तो उसे विश्वविद्यालय आकर छात्र सहायता केंद्र से फार्म लेकर टोकन भरना पड़ता है । जिसके बाद उसी फार्म का निचला हिस्सा बतौर पावती विद्यार्थी को दे दिया जाता है । वहीं अगर गलती से वह पावती किसी कारणवश खो जाए तो विद्यार्थी को शुरू से शुरूआत करना होती है । तकनीकी दौर में विश्वविद्यालय में आफलाइन प्रक्रिया होना प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है ।

15 दिन में निराकरण का दावा

विश्वविद्यालय प्रबंधन का दावा है कि अंकसूची से संबंधित समस्या का निराकरण टोकन लगने के 15 दिन के भीतर करवा दिया जाता है । लेकिन जब इस बारे में विद्यार्थियों से सवाल-जवाब किए तो उनका पक्ष प्रबंधन के दावे से ठीक विपरीत निकला । वहीं कुछ ऐसे भी छात्र थे जो अन्य राज्यों से आकर टोकन लगा गए और कई महीने बीतने पर भी इसका कोई समाधान नहीं मिला ।

आज तक नहीं सुधरा नाम

27 जनवरी 2020 को अंकसूची में नाम सुधरवाने के लिए टोकन लगाया था । दो साल बीत जाने पर भी आज दिन तक न कोई समाधान मिला है और न ही कोई संतुष्टिजनक जवाब । जब मैनें स्वयं कार्यवाही की स्थिति जानना चाही तो इधर-उधर फाइलाें में उलझाते रहे ।

-आशीष सिंह, निवासी मुरैना

दूसरे सेमिस्टर की अंकसूची भेज दी

मैनें अपनी एमए के तीसरे सेमिस्टर की डुप्लीकेट अंकसूची मंगवाने के लिए टोकन लगाया था । 20 दिन बीत जाने पर मुझे एमए की दूसरे सेमिस्टर की अंकसूची थमा दी । जब मैंने इस पर आपत्ती जताई तो कहा दूसरा आवेदन कर दो बदलवा देंगे । जेयू में बहुत लापरवाही है ।

- स्नेहा राजौरिया , छात्रा- एमएलबी कालेज

Posted By: anil tomar

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