Gwalior National Girl Child Day News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। 'बेटी से है घर का आंगन रोशन" यह बात वर्तमान स्थिती को देखते हुए सटीक साबित हो रही है। अब लोग बेटियों को बचाने और उन्हें शिक्षित करने के लिए जागरूक हो रहे हैं। रविवार को राष्ट्रीय बालिका दिवस पूरे देश में मनाया जा रहा है। यह उत्सव मनाना भी स्वभाविक है, क्योंकि आज हर क्षेत्र में बेटियों ने देश का नाम पूरे विश्व में रोशन किया है। इस अवसर पर नईदुनिया शहर की ऐसी होनहार बेटियों के बारे में बताने जा रहा है, जिन्होंने देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपनी प्रतिभा का परचम लहराकर साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं हैं। देश की बेटियों ने गायन, नृत्य, खेल, डिफेंस, वैज्ञानिक आदि क्षेत्रों में अपनी जगह बनाकर न केवल खुद की प्रतिभा को निखारा है, बल्कि दुनिया को बेटियों पर गर्व करने का मौका भी दिया है। 24 जनवरी 1966 को भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शपथ ली थी, इसलिए हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है।

शहर की बेटियां जिन्होंने देश में किया नाम रोशन

भारत को रिप्रजेंट कर महसूस किया गर्वः थाटीपुर दर्पण कॉलोनी में रहने वालीं इंटरनेशनल हॉकी प्लेयर करिश्मा यादव ने बताया कि वह 2009 में हॉकी समर कैंप में हिस्सा लेने के लिए गई थीं, फिर हॉकी मेरी रग-रग में कैसे बसता चला गया पता ही नहीं चला। मेरे घर में खेल के क्षेत्र से कोई नहीं जुड़ा है। हमेशा स्टेडियम में खेलने वाले प्लेयर्स को देखकर ही मन में ठाना की एक दिन देश को अपने खेल से रिप्रजेंट कर देश का नाम रोशन करूंगी। 2014 में हमने न्यूजीलैंड में टेस्ट सीरिज में हार और जीत दोनों का ही सामना किया, फिर 2015 में ज्यूनियर इंटरनेशनल प्लेयर के रूप में खेला। इसके बाद फिर लगातार खेलती रही और 2019 में इंटरनेशनल हॉकी प्लेयर के रूप में विक्रम अवॉर्ड अपने नाम कर अपने देश, माता-पिता और कोच का नाम रोशन किया।

तानसेन समारोह में प्रस्तुति देना सौभाग्य रहाः शास्त्रीय गायन ध्रुपद केंद्र से योगिनी तांबे ने बताया कि उनकी बचपन से ही गायन में रुचि रही है, इसलिए काफी कम उम्र से ही मैंने ध्रुपद केंद्र में प्रवेश लिया और तालीम लेना शुरू की। वे डागर घराने से हैं, फिलहाल गुरु-शिष्य परंपरा से हैं। इसलिए अभी तक समूह में ही प्रस्तुतियां दी हैं। उन्होंने बताया कि वे चंदेरी में होने वाले बेजू बाबरा महोत्सव में प्रस्तुति दे चुकी हैं। देहरादून में विरासत महोत्सव, बनारस में होने वाले ध्रुपद मेले में भी प्रस्तुति दे चुकी हैं। साथ ही 2020 के तानसेन समारोह में भी उन्होंने समूह में प्रस्तुति दी थी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत करने पर मिलती है खुशीः थाटीपुर चौहान प्याऊ के पास रहने वालीं वाणी पाठक ने बताया कि उन्होंने शास्त्रीय नृत्य कथक तीन साल की उम्र से ही सीखना शुरू कर दिया था। क्योंकि मेरी मां की इच्छा थी कि में कथक नृत्य सीखूं। वाणी ने बताया कि वे जिला स्तरीय, राष्ट्रीय स्तर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। सिंगापुर, श्रीलंका, काठमांठू, पुणे आदि जगहों पर होने वाले महोत्सवों में कथक की प्रस्तुतियां देकर वे कई अवॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं। मुझे सबसे ज्यादा खुशी तब होती है जब मंच पर भारत के नाम के साथ मेरा नाम लिया जाता है। यह समय मेरे लिए गर्व का क्षण होता है।

Posted By: vikash.pandey

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