- राष्ट्रीय साइबर जागरूकता माह के तहत यू-ट्यूब पर हुआ वेबिनार

- एक्सपर्ट और पुलिस अफसरों ने बताया ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे बचें

- साइबर क्राइम क्या है और कैसे आप अनजाने में इसमें शामिल हो जाते हैं

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। आमतौर पर लोगों को वॉट्सएप हैक होने पर विश्वास नहीं होता। उनका सोचना होता है कि यह तो सिर्फ हमारे मोबाइल में ही चलता है, यह कैसे हैक हो सकता है। आपका यह सोचना गलत है, क्योंकि वॉट्सएप भी हैक होता है। यह दो तरीके से हैक किया जा सकता है। एक आपका मोबाइल खुला हो और कोई उससे क्यूआर कोड स्कैन कर ले। इसके बाद वह अपने मोबाइल में उसका कापी प्रोफाइल बना लेता है। दूसरा माध्यम मोबाइल पर कोई इनाम या स्कीम का लालच देकर आपके मोबाइल पर आया ओटीपी लेकर। यह ओटीपी लेकर वह आपका वॉट्सएप हैक कर लेते हैं। इससे बचने के लिए कभी भी अपना वॉट्सएप किसी सार्वजनिक कंप्यूटर पर क्यूआर कोड से न खोलें, साथ ही मोबाइल पर किसी भी तरह की लिंक और ओपीटी को शेयर न करें। यू-ट्यूब पर आयोजित वेबिनार में स्कूल स्टूडेंट, शिक्षकों को यह टिप्स बुधवार को राज्य साइबर सेल मध्य प्रदेश के एसपी जितेन्द्र सिंह व एक्सपर्ट ने दिए हैं।

राज्य साइबर सेल द्वारा अक्टूबर महीने को राष्ट्रीय साइबर जागरूकता माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें हर दिन कार्यक्रम कर अवेयनेस बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बुधवार को राज्य साइबर पुलिस मध्य प्रदेश द्वारा यू-ट्यूब पर वेबिनार आयोजित किया गया। इसमें कोई भी व्यक्ति राज्य साइबर सेल मध्य प्रदेश के यू-ट्यूब चैनल पर जुड़कर एक्सपर्ट द्वारा बताई जा रही जानकारी का लाभ ले सकता है। मुख्य रूप से यह वेबिनार टीन ऐजर स्टूडेंट के लिए था। इसमें साइबर अपराध क्या होते हैं किस तरह अनजाने में किशोर अवस्था में बच्चे इसके शिकार हो सकते हैं, के बारे में बताया गया। साथ ही कैशलैस ट्रांजेक्शन में क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

आपको प्रभावित करने वाली दो अहम बातें

1. सतर्क रहें, बिना ओटीपी बताए भी निकल सकते हैं रुपये

वेबिनार में बताया गया है कोविड-19 के पीरियड में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बढ़ गया है। 70 फीसद ट्रांजेक्शन मोबाइल से हो रहे हैं। ऐसे में यदि आपका डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड खो जाता है तो गलतफहमी में न रहें कि बिना पिन और ओटीपी के कोई उसका दुरुउपयोग नहीं कर सकता। कई इंटरनेशनल वेबसाइट ऐसी हैं, जहां पिन और ओटीपी की जरूरत नहीं होती। ऐसे में कार्ड के खोने या गिरने पर तत्काल शिकायत करें।

2. अनजाने में साइबर क्राइम का हिस्सा बन सकते हैं

आजकल किशोर अवस्था में आने वाले बच्चे खुद को काफी एक्सपर्ट समझते हैं। ऐसे में वह जाने-अनजाने में साइबर क्राइम का हिस्सा बन जाते हैं। जैसे किसी सहपाठी का फोटो लगाकर फेक फेसबुक प्रोफाइल बनाना। लड़कियों नाम से आइडी जनरेट करना। कुछ ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म, जहां उनकी उम्र गाइडलाइन में फिट नहीं बैठती, लेकिन उम्र ज्यादा बताकर ज्वाइन करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। आवश्यक है आप अपनी उम्र सीमा और जरूरत के अनुसार ही सोशल मीडिया पर आएं और एक्टिव रहें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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