ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पांच लाख रुपये की रिश्वत लेने वाले सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा ने वसूली के लिए ही थ्रीडी मशीन लगाई थी। इसी से ही आवेदक दहशत में आकर 10 लाख रुपए दे गया। जब और रकम के लिए दबाव डाला तो आवेदक को आर्थिक अपराध अन्वेषण के दफ्तर जाने को मजबूर होना पड़ा। टाइम कीपर से सिटी प्लानर की कुर्सी पर पहुंचे प्रदीप पर एक नहीं तमाम जांच और शिकायतें लंबित हैं। इनके खिलाफ विभागीय जांच सिद्ध होने से लेकर लोकायुक्त तक में फाइल चल रही है। इतने दागी होने के बाद भी सिटी प्लानर जैसे ओहदे पर तैनात रखना, निगम आयुक्त सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। वहीं प्रदीप नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन के चहेते अफसरों में लिस्ट में भी थे।

जानकारी के अनुसार प्रदीप के पिता सूरज सिंह निगम में कर्मचारी थे, उनकी मृत्यु सन्‌ 1995 में हुई थी। पिता के स्थान पर पारिवारिक भरण पोषण की दृष्टि से प्रदीप को अनुकंपा नियुक्ति देकर टाइम कीपर के पद पर पदस्थ किया गया था। शनिवार को ही प्रदीप को एक स्थानीय रेडियो चैनल पर बतौर मेहमान बनकर इंटरव्यू देने पहुंचना था, लेकिन इससे पहले ही वह ट्रैप हो गए। उनके ट्रैप होने की खबर इंटरनेट मीडिया पर वायरल होते ही उनके पुराने कारनामे वायरल होने लगे साथ ही प्रशासन की एंटी माफिया मुहिम पर भी लोगों ने सवाल खड़े कर दिए।

नौकरी में रहकर की इंजीनियर की डिग्री

वर्मा की अनुकंपा नियुक्ति 1995 में हुई थी। इसके बाद उसने पॉलिटेक्निक कॉलेज में डिप्लोमा इन सिविल में नियमित छात्र के रूप में प्रवेश लिया। यहां से वर्ष 1995 से 1997 तक पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उसने निगम से भी पूर्णकालिक वेतन लिया।

2011 में बने भवन अधिकारी

वर्तमान में वर्मा की चल-अचल संपत्ति करोड़ों रुपये की है। उसे नवंबर 2011 में भवन अधिकारी बनाया गया था। इसके बाद वह 18 जुलाई 2013 तक भवन अधिकारी रहे। इसके बाद 27 जुलाई 2015 से 19 नवंबर 2015 तक भवन अधिकारी रहे। फिर 4 मार्च 2017 से 22 अगस्त 2018 तक भवन अधिकारी रहे। इस दौरान यह निलंबित हुए। इसके बाद 25 सितंबर 2018 से लेकर अब भवन अधिकारी व सिटी प्लानर रहे।

गलत जानकारी देकर बने भवन अधिकारी

वर्मा का मूलपद उपयंत्री है, लेकिन संचालक नगर तथा ग्राम निवेश भोपाल को भवन अधिकारी के प्रस्ताव में प्रभारी सहायक यंत्री लिखवा कर भेज दिया गया था, जबकि भवन अधिकारी के लिए बीई सिविल के साथ सहायक यंत्री या असिस्टेंट डायरेक्टर होना जरूरी है।

गलत अनुमति देने पर हुए थे निलंबित

प्रदीप वर्मा ने सिंधी कालोनी में आहूजा के भवन निर्माण की स्वीकृति हाउस नंबर 1194, 1195 की जारी की थी। गलत तरीके से स्वीकृति देने पर तात्कालीन नगर निगम आयुक्त विनोद शर्मा ने इन्हें दोषी पाते हुए निलंबित किया था। हालांकि एक माह बाद ही वह बहाल हुए साथ ही इन्हें सहायक सिटी प्लानर के पद पर पदस्थ कर दिया गया।

वर्मा के खिलाफ इन प्रकरणों में चल रही जांच

- प्रकरण क्रमांक 72/18 भवन निर्माण अनुमति में अनियमितता की जांच लोकायुक्त में

- 16/19 भवन निर्माण अनुमति में अनियमितता की जांच ईओडब्ल्यू में।

- 8/18/2/17 पहले से निर्मित मकान पर भवन अनुमति देना। विभागीय जांच।

- 2/19/2/7 ब्लू लोटस कालोनी बिना विकास के बंधक प्लाट छोड़ने पर विभागीय जांच।

- 2/11/2/7 सिटी सेंटर क्षेत्र में अवैध तलघरों का निर्माण पर विभागीय जांच।

- 190/12 भवन निर्माण अनुमति में अनियमितता की जांच ईओडब्ल्यू में।

मां और बहनों के नाम पर है यह संपत्ति

- विनय नगर में प्लाट क्रमांक 41 पर दो मंजिला भवन निर्मित है। इसका बाजार में 15 लाख 29 हजार 860 रुपये मूल्य आंका गया था।

- वर्ष 2010 में वर्मा ने मां के नाम पर दो मंजिला भवन व वार्ड-4 स्थित चौबीस बीघा कालोनी में अभय गृह निर्माण समिति से अपनी बहन आरती के नाम खरीदा। बाद में इसे महावीर सिंह को बेचा गया।

- एम-13, चौबीस बीघा कालोनी में अभय गृह निर्माण सहकारी समिति से आरती पत्नी उपेन्द्र यादव निवासी कोटे साहब का बाड़ा के नाम से खरीदा गया। इसके बाद कमल जेसवानी को बेचा गया। इसके बाद महावीर सिकरवार को बेचा गया।

- एन-14 चौबीसा बीघा कालोनी में अभय गृह निर्माण सहकारी समिति से बहन आरती के नाम से क्रय किया गया। इसके बाद इसे शिवसिंह किरार निवासी नवग्रह कालोनी को स्वत्व प्रदान करना बताया गया है।

- अजय सिंह यादव उपाध्यक्ष गृह निर्माण सहकारी मर्यादित से पटेल नगर सिटी सेंटर में अपनी मां ललिता देवी एम 41 लिटिंग फ्लोवर स्कूल के पास फ्लैट क्रमांक 103 खरीदा गया।

प्रदीप वर्मा वाले मामले में निगमायुक्त से सीधी बात

प्रः- सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हैं। उन पर क्या कार्रवाई की गई?

उः- प्रदीप वर्मा को निलंबित कर दिया गया है।

प्रः- प्रदीप ने ईओडब्ल्यू की पूछताछ में कहा है कि वह ऊपर तक अधिकारियों को रिश्वत का हिस्सा देता है।

उः- पकड़े जाने के बाद तो आदमी कुछ भी बोलेगा, लेकिन यह सत्य नहीं है।

प्रः- पूर्व में भी प्रदीप की कई शिकायतें थीं, लेकिन इन पर क्या कार्रवाई की गई?

उः- पूर्व में वर्मा को निलंबित किया जा चुका है। साथ ही निगम की ओर से इन पर एफआइआर के लिए भी लिखा गया है। विभागीय जांच भी बैठाई गई हैं, वेतन वृद्धि रोकी गई है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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