ग्वालियर, नईदुनिया रिपोर्टर। सोमवार को शहर आए केन्द्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल आईआईटीटीएम और आईएचएम पहुंचे। यहां उन्होंने स्टूडेंट्स से इंटरेक्शन कर मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जाना। इतना ही नहीं विजिट के दौरान पर्यटन मंत्री पटेल की फूड च्वॉइस भी सामने आई। आईएचएम में जब उनके सामने फूड सर्व किया गया, तब उन्होंने साफ कह दिया अगर डिश में लहसन और प्याज न हो तो ही वे इनका सेवन करेंगे।

कॉफी या चाय भी वे गाय के दूध की पिएंगे। समय की कमी के कारण आईएचएम प्रबंधन दोबारा बिना लहसन प्याज की डिश तो नहीं बना पाया, लेकिन उसने बाहर से मंत्री पटेल के लिए गाय का दूध जरूर मंगाया। इस विजिट में मंत्री पटेल ने प्रबंधन से चर्चा कर जाना कि दोनों संस्थान केन्द्र सरकार के हैं, जबकि उनके लिए जमीन राज्य सरकार ने मुहैया कराई है।

इसका स्टूडेंट्स को मिलने वालीं सुविधाओं पर असर पड़ता है। खासतौर पर तब जब केन्द्र और राज्य में सरकार अलग-अलग पार्टी की सरकारें होती हैं। इस पर उन्होंने इस समस्या को ग्वालियर सांसद विवेक शेजवलकर तक पहुंचाने की बात कही।

आईआईटीटीएम में युवाओं से कहा-करें और ऐतिहासिक स्थलों की खोज

मंत्री पटेल ने युवाओं से इंटरेक्शन करते हुए कहा कि वे तभी आगे बढ़ सकेंगे, जब खोजी प्रवृति को अपनाएंगे। युवा सिर्फ शोध कार्य ही न करें, कुछ नए ऐतिहासिक स्थलों को भी खोजें। क्योंकि हमारे देश में देशी से अधिक विदेशी पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। स्टूडेंट्स से उन्होंने कहा कि वे किसी चेप्टर को रटने के बजाय प्रैक्टिकल करें। ऐसा करने से डेफ्थ में जाएंगे और चेप्टर को कभी नहीं भूलेंगे।

शहर में लगातार अवेयरनेस प्रोग्राम चलाएं और जनता से सीधा संवाद कर पर्यटन संबंधी उनकी परेशानियों का निदान करने की कोशिश करें। वहीं प्रबंधन से कहा कि वे पर्यावरण की दिशा में काम करते हुए कैंपस को नो पॉलीथिन जोन बनाएं। पॉलीथिन को पूरी तरह से बंद कर दें, क्योंकि इसके इस्तेमाल से पर्यावरण को खाया नुकसान पहुंचता है।

आईएचएम के स्टूडेंट्स से कहा-जॉब के पीछे न भागें

मंत्री पटेल ने आईएचएम के स्टूडेंट्स से इंटरेक्शन किया। कुछ स्टूडेंट्स ने स्पर्धा की वजह से जॉब न मिलने की बात कही। इस पर उन्होंने कहा कि वे जॉब के पीछे न भागें, खुद को इतना काबिल बनाएं कि दूसरों को जॉब दे सकें। सरकार द्वारा उन्हें स्टार्टअप देने और आंत्रप्रेन्योर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनसे वे सीधे जुड़कर अपना कॅरियर संवार सकते हैं।

इसके बाद उन्होंने फूड रिसर्चर से मुलाकात की और कहा कि यह फील्ड भी पर्यटन के दायरे में आता है। जैसे हमें भोपाल की भजिया पसंद है तो हम जब भी भोपाल जाएंगे वहां इसका टेस्ट जरूर लेंगे, फिर चाहे एक ही शहर में कितनी भी दूरी क्यों न तय करनी पड़े।

ऐसे कई खाने के शौकीन हैं, जो टेस्ट के लिए यहां से वहां सफर करते हैं। जहां तक हो फूड रिसर्चर नए टेस्ट ईजाद करें और उन्हें हेल्दी बनाएं। उन्होंने स्टूडेंट्स से सवाल कर उनकी नॉलेज को भी परखा। इस मौके पर संस्थान प्राचार्य एमके दास के साथ फैकल्टी मेंबर्स उपस्थित थे।