ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि।Gwalior News जिला उपभोक्ता प्रतितोषण फोरम ने इलाज में लापरवाही बरतने पर शांता नर्सिंग होम को 60 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। डिलेवरी के लिए भर्ती महिला के ऑपरेशन में डाक्टरों ने लापरवाही बरती थी। पेट में प्लेसेंटा मेटेरियल छोड़ दिया था, जिससे महिला के पेट में ब्लीडिंग होती रही। इस वजह से एक किडनी भी गंवानी पड़ी। फिर पीड़िता की जान चली गई। महिला के परिजनों ने शांता नर्सिंग होम से क्षतिपूर्ति के लिए दावा पेश किया था।

विकास जैन ने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि परिवादी ने अपनी पत्नी सपना जैन को 27 अगस्त 2015 को डिवेलवरी के लिए पाटनकर चौराहा स्थित शांता नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। डॉ.शांता गुप्ता ने डिलेवरी कराई। डिलेवरी के दौरान अपनी अपात्र बहू की सहायता ली थी। डिलेवरी के पश्चात सपना जैन के टांकों से खून निकलने लगा और टॉयलेट भी बंद हो गई।

स्थिति बिगड़ने पर 28 अगस्त 2015 को नवजीन हॉस्पिटल में रेफर कर दिया। इस हॉस्पिटल ने 5 घंटे भर्ती रखने के बाद जेएएच रेफर कर दिया। जेएएच में भी उसका इलाज नहीं हो सका। जब स्थिति बिगड़ने लगी तो सर गंगाराम हॉस्पिटल दिल्ली ले गए। जहां पर सपना 2 महीने भर्ती रही।

अधिक खून बहने व डीआईसी के कारण किडनी खराब हो गई। किडनी खराब होने से वह डायलिसिस पर आ गई, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई। परिवादी ने तर्क दिया कि शांता नर्सिंग होम में उपचार के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं थे। डिलेवरी के दौरान प्लेसेंटा मेटरियल पेट के अंदर ही छोड़ दिया।

इस कारण ब्लीडिंग हो गई थी। सर गंगाराम हॉस्पिटल में जांच के दौरान पाया कि गर्भाशय में प्लेसेंटा मटेरियल मौजूद है। फोरम ने दोनों का पत्र सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। डिलेवरी के दौरान कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं था। न आईसीयू की व्यवस्था थी। रेफर करने में भी देर कर दी। इसको फोरम ने सेवा में कमी माना। फोरम ने आदेश दिया कि परिवादी को शांता नर्सिंग होम 60 हजार रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करे।

Posted By: Nai Dunia News Network