• घायल गायों को मौके पर करते हैं उपचार उसके बाद भेजते हैं गोशाला

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि) श्रीकृष्णायन देशी गोरक्षाशाला के संतों की अगुआई में गायों की सेवा के क्षेत्र में एक अनूठा प्रकल्प शुरू किया गया है। भिंड से दतिया और मुरैना से दतिया तक के 200 किलोमीटर हाइवे पर गोसेवा पेट्रोलिंग शुरू की है। इस प्रकल्प से इन हाइवे के किनारे रहने वाले करीब 1500 से ज्यादा गोसेवकों को जोड़ा है। इन गोसेवकों को मोबाइल अथवा वाट्सएप से सूचना मिलने पर यह हाइवे पर दुर्घटना की शिकार गायों का मौके पर ही इलाज कर उसे नजदीकी गोशाला तक पहुंचाते हैं। इसके लिए भिण्ड, मुरैना, डबरा व ग्वालियर में गोसेवकों ने शासन एवं स्वयं के पैसों से एंबुलेंस भी तैयार कराई हैं। इसके सकारात्मक परिणाम यह आए हैं कि घायल गायों का रेस्क्यू हो जाने से सड़क हादसों की संख्या बेहद कम हो गई।

श्रीकृष्णायन देशी गोरक्षाशाला के संत स्वामी अच्युतानंद और स्वामी रिषभानंद बताते हैं कि गोसेवा पेट्रोलिंग प्रकल्प से जुड़े गोसेवक हाइवे पर नियमित निरीक्षण भी करते हैं। अभी तक इस प्रकल्प के जरिए छह सैकड़ा से अधिक गायों का उपचार किया जा चुका है। भिण्ड, मुरैना, डबरा एवं लालटिपारा सहित शिवपुरी हाइवे पर रानीघाटी गोशाला के पास स्वयं की एंबुलेंस भी है। जिनसे घायल गोमाता अस्पताल अथवा गोशाला तक पहुंचती है। इन गोशालाओं में चिकित्सकों की टीम भी तैनात रहती है। लंबे इलाज के लिए इन गायों को लालटिपारा गोशाला एवं रानीघाटी गोशाला में लाया जाता है। लालटिपारा गोशाला नगर निगम एवं रानीघाटी गोशाला का संचालन जिला प्रशासन करता है।

इन स्थानों पर यह गोसेवक चलाते हैं गोशाला

भिण्ड में मंशापूर्ण गोकुलधाम गोशाला है। यहां पर 100 गाय हैं। इस गोशाला का संचालन विपिन चतुर्वेदी एवं उनकी टीम करती है। इस टीम में 150 के करीब गोसेवक हैं। यह टीम भिण्ड से गोहद तक 40 किलोमीटर के दायरे में गोसेवा का कार्य करती है। इसके मालनपुर में केशव पटेल सहित 10 गोसेवकों की टीम हैं, यह टीम मालनपुर से गोहद एवं ग्वालियर तक गोसेवा का कार्य संभालती है। वहीं मालनपुर, मोतीझील सहित ग्वालियर शहर में नगर निगम के कर्मचारी एवं शेखर सिंह तोमर, अरूण तिवारी की करीब 500 गोेसेवकों की टीम कार्य संभालती है। यह टीम ग्वालियर शहर, ग्वालियर से टेकनपुर, एवं जरूरत पड़ने पर मोहना तक गोसेवा का कार्य करती है। डबरा में चांदपुर गोशाला है यह गोशाला सिंध नदी के किनारे बनी है। इसका संचालन हरीओम मिश्रा सहित 400 गोसेवकों की टीम करती है। यह टीम टेकनपुर से डबरा, डबरा से दतिया, डबरा से भितरवार तक गोसेवा का कार्य करती है। वहीं पिछोर में भी मॉ पार्वती गोशाला है। यहां पर आयुष पालीवाल अपनी टीम के साथ गोसेवा का कार्य करते हैं। यह टीम डबरा से पिछोर एवं ग्रामीण क्षेत्रांे में गोसेवा करती है। वहीं घाटीगांव में देवनारायण गोशाला है, यह भी थोड़ी घायल गायों को उपचार के लिए लाया जाता है। जबकि मोहना से ग्वालियर तक घायल हुई गायों को एंबुलेंस के जरिए लालटिपारा एवं रानीघ्ााटी एवं देवनारायण गोशाला ले जाया जाता है।

साथ लेकर चलते हैं ड्रेसिंग का सामान

गोसेवा के साथ अपने साथ घायल गायों के उपचार का सामान हमेशा साथ लेकर चलते हैं। कहीं कोई घायल गाय दिख जाए तो यह टीम तत्काल उसके उपचार में जुट जाती है।

स्वयं के पैसों से खरीदते हैं दवाईयां

गायों की सेवा के लिए सभी टीमों के सदस्य आपस में चंदा एकत्रित कर स्वयं के पैसों से दवाईयां खरीदते हैं। इसके साथ ही गोशालाओं में भी गायों की देखभाल के लिए यह आपस में पैसे एकत्रित करते हैं।

कोरोनाकाल में गायों को खिलाते थे चारा

कोरोनाकाल में जब लोग डर के कारण अपने घरों में रहते थे। उस समय इन गोसेवकों की टीम तीन पहिया, दो पहिया, एवं चार पहिया वाहनों में हरा चारा लेकर शहर, हाइवे, गली मोहल्लों में घूमते थे। जहां भी भूखी गाय दिखती थी यह लोग वहां पर उन्हें हरा चारा और पानी देते थे।

वर्जन

गायों के प्रति हमारे मन में पहले से ही श्रद्वाभाव था, यह श्रद्वाभाव हमारे संस्कारों में है। लेकिन संतों के आशीर्वाद से हमें गोसेवा करने की प्रेरणा मिली। और उनके मार्गदर्शन में हम आगे बढ़ते गए अब हजारों हाथ हमारी मदद के लिए तैयार रहते हैं।

शेखर सिंह तोमरृ गोसेवक

Posted By: anil.tomar

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