Gwalior News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। धरोहरों को सहेजना स्वयं की जिम्मेदारी समझें, क्योंकि कहीं न कहीं यह अतीत और पूर्वजों से परिचय कराती है। इनसे जुड़ीं कहानियां हमें जीने की कला सिखाती हैं। प्राकृतिक, पुरातात्विक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक अथवा धार्मिक धरोहर का हमारे जीवन से गहरा संबंध है। महाभारत के अनुसार हमें इनकी रक्षा करनी चाहिए। धन के नष्ट होने पर इतना नुकसान नहीं होता है, जितना धरोहर के नष्ट होने से होता है। हमें अपने गांव और शहरों के आसपास की धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाने चाहिए। कुछ धरोहर उदासीनता और जागरूकता के अभाव में खंडहर होती जा रही है। यह कहना था हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय विवि के इतिहास के प्राध्यापक डा. राघवेंद्र सिंह यादव का। वे रविवार को माधव महाविद्यालय के स्नातकोत्तर इतिहास द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में शामिल सदस्यों को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करहे थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में गोरखपुर के अंतराष्ट्रीय धरोहर छायाकार संदीप श्रीवास्तव, डा. संतोष शर्मा और मुरैना के पीएसयू महाविद्यालय के प्राचार्य डा. जितेंद्र शर्मा मौजूद थे। विश्व धरोहर दिवस के उपलक्ष्य में हुए वेबिनार में इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मनोज अवस्थी, सागर के डा. योगेश यादव, डा. भारत भूषण, संतोष बघेल और डा. संतोष शर्मा आदि उपस्थित थे।

Posted By: anil.tomar

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