-रामदास घाटी शिंदे की छावनी पर रहने वालीं मीरा अरोरा के मकान का चल रहा बंटवारे का केस

-पहली मंजिल पर उन्हें रहने को भेज दिया था, नीचें नहीं उतर पा रहीं थीं, प्रशासन ने की मदद

ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। 75 साल की मीरा अरोरा चलने फिरने में लाचार हैं, इतना भी आवागमन नहीं कर पातीं कि पहली मंजिल से नीचे आ जाएं। पिछले तीन माह से खुला आसमान देखा न घर के बाहर की सड़क देखी थी। घर के बंटवारे का केस कोर्ट में चल रहा है और अविवाहित होने के कारण कोई अपना अब नहीं है। अकेली महिला की पीड़ा प्रशासन तक पहुंची तो एसडीएम लश्कर कोर्ट ने सुनवाई लगाईं। जांच में पता चला कि यह मकान मीरा व उनके रिश्ते के भाई अरविंद अरोरा के नाम है और अरविंद अरोरा ने इंदर सिंह यादव को मकान बेचने का एग्रीमेंट कर दिया है। अरविंद बाहर रहते हैं और यहां इंदर सिंह का गार्ड व उसकी पत्नी रहती थी, जिन्होने बुजुर्ग महिला को पहली मंजिल पर जबरिया भेज दिया था। प्रशासन ने बुधवार को पुलिस के साथ गार्ड व उसकी पत्नी को बाहर निकाला और महिला को भू-तल पर शिफ्ट कराया।

एसडीएम अनिल बनवारिया ने बताया कि सिविल कोर्ट में बंटवारे का मामला चल रहा है। इस मकान को दो लोगों के नाम किया गया, जिसमें एक मीरा अरोरा और दूसरे अरविंद अरोरा हैं। अरविंद बाहर रहते हैं और उन्होने मकान काे बेचने का एग्रीमेंट इंदरसिंह यादव बालाजी गार्डन को कर दिया। इंदरसिंह ने बंटवारा हुए बिना ही अपनी मर्जी से बुजुर्ग मीरा अरोरा को पहले तल पर भेज दिया, जबकि वे सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ हैं। इस मामले में सुनवाई लगाई गईं और मौका दिया, लेकिन इंदर सिंह महिला को नीचे शिफ्ट नहीं करा रहे थे। बुधवार को प्रशासन की टीम ने गार्ड अनिल तोमर व उसकी पत्नी स्नेहलता तोमर को बाहर निकाल दिया। मीरा अरोरा ने मौके पर प्रशासन को धन्यवाद दिया और कहा कि अफसरों के कारण वे खुला आसमान देख पाई हैं।

Posted By: vikash.pandey

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