Gwalior News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। बच्चों की न समझदारी उनके भविष्य को छीन लेती है। बच्चों को तलाशने के लिए चलाए जाने वाला ऑपरेशन मुस्कान और स्माईल के तहत कई गुमशुदा बच्चों पुलिस,चाइल्ड हेल्पलाइन और अपराध अनुसंधान विभाग बाल सहायता केंद्र की मदद से बच्चों को उनके अभिभावकों से मिलवाया गया है। बच्चों को प्राप्त करने क बाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी सीडब्लयूसी के सामने लाया जाता है। उस दौरान बच्चों से बातचीत करने पर पता चलता है कि वह माता-पिता से नाराज होकर घर छोडकर आए हैं। लेकिन अब उन्हें अपनी गलती का अहसास है उन्हे अपने घर वापस जाना है। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल सहायता केंद्र की टीम उनके माता-पिता से मिलवाती है। डीसीबी के आंकडों के अनुसार पांच साल में 1729 बच्चों को उनके अभिभावकों से मिलवाया जा चुका है। गुमशुदगी में सबसे ज्यादा केस 12 से 18 साल तक के बालक-बालिका होते हैं।

सबसे ज्यादा बालिकाएं होती है गुम-

गुम हुए बच्चों में सबसे ज्यादा गुमशुदगी में बालिकाओं की दर्ज होती है। डीसीबी से प्राप्त आंकडो में यह साफ नजर आता है। जिनकी उम्र12 से 18 तक की होती है। 2016 से 2020 की बात करें तो ग्वालियर से बालक और बालिकाअों को मिलाकर कुल 1707 गुम और दस्तयाब 1729 हुए है। लेकिन कोरोना की वजह से इन बच्चों को खोजने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन मुस्कान और स्माइल थम गए हैं। साथ ही 2021 में जनवरी से मई तक 139 बालक और बालिकाएं गुम हुए है वहीं 214 बरामद हुए हैंं।

वर्ष - बालक -बालिकाएं

2016-2020 -645 -1 062 गुम

2016-2020 -609 -983 प्राप्त

2021 जनवरी से मई तक -38 -112 गुम

2021 जनवरी से मई तक -42 -172 प्राप्त

2020 में बालकों को मिलवाया माता-पिता से -

पिता से नाराज होकर घर छोडकर गया-

केस-1

15 साल का बालक घर छोडकर चला गया था। काफी तलाश करने के बाद अभिभावकों को न मिलने पर गुमशुदगी में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। जिसके बाद बच्चे को पुलिस,सीआइडी बाल सहायता केंद्र की टीम द्वारा तलाशना शुरू किया। ठीक दो माह के बाद बच्चा कोटा में मिला। फिर माता-पिता सहित आठ लोगों की टीम कोटा पहुंचकर बच्चे को ग्वालियर लाया गया। जिसके बाद उसे माता-पिता के सुपूर्द कर दिया गया।

केस-2

ग्वालियर व्यापार मेला में दो छोटे व्यापारी अपने तीन बच्चों को लेकर अकबरपुर से मेला में दुकान लगाने आए थे। वह अपने काम में इतने व्यस्थ रहे कि अपने तीनों बच्चे जो 3 से 6 साल के थे उनपर ध्यान देना ही भूल गए। जब बच्चे तलाशने के बाद नहीं मिले गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। 3 से 4 माह बाद सीआइडी बाल सहायता केंद्र की टीम ने बच्चों को तलाशा जो कि भीख मांगते हुए मिले। जिसके बाद कुछ दिन आश्रम में रखने के बाद उन्हें माता’पिता के सुपुर्द किया।

Posted By: anil.tomar

NaiDunia Local
NaiDunia Local