ग्वालियर, नईदुनिया रिपोर्टर। भागदौड़ और स्पर्धाभरी जिंदगी ने हर वर्ग को तनाव की गिरफ्त में पहुंचा दिया है। 17 साल से लेकर 50 तक के लोग भी सुकून की छांव में बैठने के लाख जतन करते हैं, मगर सफलता कुछ को ही मिलती है। जो फेल होते हुए वे हालातों के आगे मजबूर होकर घुटने टेक देते हैं और कोई न कोई गलत कदम उठा लेते हैं। मंगलवार को पड़ने जा रहे 'वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंट डे' पर 'नईदुनिया लाइव' ने शहर में तनाव को लेकर स्थिति जानी, जिसमें सर्वाधिक 17 से 35 साल के युवा इसकी गिरफ्त में सामने आए।

काउंसलर युवा वर्ग की इस स्थिति से चिंतित हैं, वे कहते हैं युवाओं के मन में तनाव के कारण आया डिप्रेशन पूरे घर में कलह का कारण बन रहा है। दांपत्य जीवन बिखरकर कोर्ट की दहलीज पर पहुंच रहे हैं, बच्चे अपने बदले हुए व्यवहार से पैरेंट्स को घर से बाहर निकाल कर रहे हैं।

जिसका सीधा-सीधा असर समाज पर पड़ रहा है। डॉ. मुकेश चंगुलानी कहते हैं कि स्पर्धा ने युवाओं के मन में अलग ही दवाब बना लिया है। अगर उसे जॉब मिल भी जाती है तो वह टारगेट के फेर में फंसा रहता है। इस वजह से कुछ युवा तो सुसाइड करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इसलिए यह समय संभलकर चलने का है। समझदारी सिर्फ युवाओं को ही नहीं उनकी पत्नी और पैरेंट्स को भी दिखानी चाहिए। उस जगह से उन्हें दूरी बनानी होगी, जहां से वे अपने घर तनाव लेकर लौटते हैं।

क्या कहती है डब्लूएचओ की रिपोर्ट-

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्यूएचओ) का कहना है कि दुनियाभर में हर साल लगभग 8 लाख लोग सुसाइड करते हैं। जिसका मुख्य कारण डिप्रेशन ही निकलर सामने आया है। इस हिसाब से हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान गंवा रहा है। डब्लूएचओ के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां सुसाइड की दर विश्व के अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक है।

शहर के सच्चे उदाहरण, लेकिन परिवर्तित नाम के साथ

केस-1

उम्र 18, कपिल (परिवर्तित नाम)

बहोड़ापुर क्षेत्र में रहने वाले कपिल ने एक बार टेरिस के कूदकर सुसाइड करने की कोशिश थी। आसपास के लोगों ने दौड़कर उसकी जान बचाई। इसकी वजह दो थी, पहली बोर्ड परिणाम में उसके अंकों का कम आना। दूसरी वजह, कपिल को लगता था कि वह अपने पैरेंट्स की अनचाही संतान है। इसलिए उसके पैरेंट्स अटेंशन नहीं देते हैं। जैसे अन्य बच्चों के पैरेंट्स अपने को प्यार और केयर करते हैं। यह सोच भी डिप्रेशन जाने की वजह बनी। कपिल ने सोच लिया अब उसे जीना नहीं है।

केस-2

उम्र 17, कामना (परिवर्तित नाम)

मुरार में रहने वाली एक परिवार की कामना के सपना है, वह प्रशासनिक अधिकारी बने। लेकिन लड़कियों के प्रति छोटी सोच रखने वाले लोगों के बीच में कामना प्रयासों में सफल न हो पाईं। पिता ने कामना से बात करना बंद कर दिया, भाइयों का प्यार भी उसे नहीं मिला। स्कूल में कामना अगर किसी लड़के से बात कर लेती थी तो घर पर उसे पैरेंट्स की मार मिलती थी। इसके बाद कामना ने कई बार सुसाइड अटेम्प्ट किया, शायद उसकी किस्मत अच्छी थी। वे खुद चलकर काउंसलर के पास गईं और एक राह पर चलकर उन्होंने पीएससी की तैयारी शुरू कर दी है।

केस-3

उम्र 27, बबीता (परिवर्तित नाम)

किलागेट क्षेत्र में रहने वाली बबीता के पति बीमारी के चलते गुजर गए। पीछे छोड़ गए अपनी पत्नी और दो बच्चों को हालातों से लड़ने के लिए। उनका बेटा जिम्मेदारी आने के बाद घर छोड़कर चला गया। कई दिन तक बबीता ने उसकी तलाश की, मगर वह नहीं मिला। इस बीच उसे पेट भरने के लिए भी हालातों से लड़ना पड़ा, जब बात बिगड़ी तो बबीता ने रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर जान देने की कोशिश की। मगर पास ही ट्रैक पर कर्मचारी काम कर रहे थे, जिन्होंने उसे बचा लिया।

शहर में 200 मामले पहुंचते हैं पुलिस के पास

अलग-अलग थानों से मिली जानकारी के अनुसार शहर में हर साल लगभग 200 लोग किसी न किसी कारण से सुसाइड कर लेते हैं। कई सामाजिक संस्थाएं भी उन्हें अवेयर करने के लिए प्रोग्राम चला रही हैं।

तीन साल का आंकड़ा

2017- 200 सुसाइड केस

2018-219 सुसाइड केस

2019-185 सुसाइड केस

(इनमें 70 प्रतिशत संख्या 15 से 35 साल के युवाओं की है)

प्रयासों से बढ़ा रहे बच्चों का मनोबल

हर साल बोर्ड परिणाम के बाद बच्चों के सुसाइड करने की खबरें सुनने को मिलती है। बच्चों की सोच को बदलने के लिए शिक्षा विभाग ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। तनाव को दूर करने के लिए महीने के हर शनिवार बाल सभा को अनिवार्य कर दिया है। जिससे बच्चे खुश रहकर पढ़ाई कर सकें और तनाव से दूर रह सकें। अशोक दीक्षित, एडीपीसी

हम ऐसे पहचान सकते हैं परेशान व्यक्ति की परेशानी

-संबंधित व्यक्ति अगर हटकर व्यवहार करे तो समझ लीजिए परेशान है।

-सामान्य दिनों की तुलना में अगर इंसान कम काम कर रहा है तो वह परेशान है।

-अपनी फील्ड को छोड़ दूसरी फील्ड में अवसर तलाशना भी तनाव।

-बात-बात पर रोना आ रहा हो और निगेटिव बात जुबां पर आ रही हों तो भी।

-सुसाइड करने से पहले हर व्यक्ति एक इंडिकेशन देता है।