भोपाल। नईदुनिया स्टेट ब्यूरो। Gwalior News ग्वालियर के घाटीगांव अभयारण्य में सोनचिरैया को फिर से बसाने के प्रयास शुरू हो गए है। वन विभाग ने 10 साल की योजना तैयार की है। जिस पर 5112 लाख रुपए खर्च होंगे। विभाग इस क्षेत्र को मुरैना के घड़ियाल प्रजनन केंद्र की तर्ज पर विकसित करेगा और राजस्थान के जैसलमेर से सोनचिरैया के अंडे लाकर यहां उनकी हेचिंग कराई जाएगी। मांसाहारी वन्यजीवों से सोनचिरैया के अंडे बचाने के लिए क्षेत्र में तार फेंसिंग सहित सुरक्षा के अन्य इंतजाम भी किए जाएंगे। घाटीगांव अभयारण्य अधीक्षक ने क्षेत्र में सोनचिरैया को बसाने की योजना वाइल्ड लाइफ मुख्यालय को भेज दी है।

38 साल बाद एक बार फिर घाटीगांव में सोनचिरैया को बसाने की योजना बनाई गई है। इस बार पक्षियों को अपने हाल पर नहीं छोड़ा जाएगा। बल्कि घाटीगांव में जैसलमेर से अंडे लाकर हेचिंग कराई जाएगी और इन अंडों से निकलने वाले चूजों को अभयारण्य में सुरक्षित वातावरण दिलाने की कोशिश की जाएगी।

वैसे तो वन विभाग घाटीगांव में एक भी सोनचिरैया नहीं होने की जानकारी विधानसभा को दे चुका है, लेकिन विभाग के अफसरों का मानना है कि क्षेत्र में अभी भी ये पक्षी है। वाइल्ड लाइफ मुख्यालय के अफसर बताते हैं कि सोनचिरैया के सर्वाइव करने की पूरी संभावना के चलते ही फिर से प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि योजना राशि मिलने पर ही आगे बढ़ पाएगी।

12 साल से नहीं दिखी सोनचिरैया

घाटीगांव अभयारण्य क्षेत्र में पिछले 12 साल से सोनचिरैया नहीं दिखाई दी है। वर्ष 2008 में एक घायल पक्षी मिला था। जिसकी इलाज के दौरान ग्वालियर में मौत हो गई थी। हालांकि वर्ष 2011 में देवखो के जंगल में सोनचिरैया का अंडा जरूर मिला था।

111 वर्ग किमी क्षेत्र घट जाएगा

विभाग सोनचिरैया को फिर से बसाने की कोशिशों में लगा है, लेकिन घाटीगांव अभयारण्य को 111 वर्ग किमी क्षेत्र कम हो रहा है। जिसका इस योजना पर असर पड़ सकता है। विभाग स्थानीय लोगों की समस्या के चलते करैरा अभयारण्य को डि-नोटिफाई कर चुका है और घाटीगांव अभयारण्य का 111 वर्ग किमी क्षेत्र भी डि-नोटिफाई करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। संभवत: यह भी जल्द ही मंजूर हो जाएगा।

Posted By: Hemant Upadhyay

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